पंडित धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों “हिंदू राष्ट्र” के नारे और यात्राएं निकाल रहे हैं। उनका संदेश है, “जातिपाती की करो विदाई, हम सब हैं भाई-भाई।”लेकिन सवाल है—क्या यह वाकई समाज सुधार का प्रयास है, या सिर्फ राजनीतिक एजेंडा? 🔸 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोपस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू राष्ट्र यात्रा पर तीखा प्रहार …
भगत सिंह का लव कन्फैशन
भगत सिंह लाहौर के नैशनल कालेज के स्टूडैंट थे. तब भारत-पाकिस्तान वाली सरहदें न थीं. उम्र कोई 20-21 साल. जवान और बेतहाशा खूबसूरत. औसत ऊंचाई, पतला व लंबा चेहरा, चेहरे पर हलके से चकत्ते, झानी दाढ़ी और छोटी सी मूंछ. उम्र की इस नाजुक दहलीज में विचारों की धार पैनी थी.उस दौरान एक सुंदर सी …
धर्म की बेड़ियों में फंसी औरत
सभी धर्मों, धार्मिक ग्रन्थों और वेदों में, स्त्री के रूप और व्यवहार की जो चर्चा की गई है वह औरत की व्यथा का बयान ही है. कोई भी धर्म महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं रहा है, तो क्यों कर हम इन धार्मिक पाखंडों का लबादा ओढ़े रखें. अब हम उन धार्मिक नारियों (सीता, द्रौपदी, सावित्री, …
The Condition of Non-Believers in India: A Silent Struggle
Peoples out slogans during a rally on the 10th death anniversary of Indian activits Narendra Dhabolkar, demanding justice of his killing in Mumbai, India, Saturday, August 19, 2023. Dhabolkar,a renowned rationalist,was gunned down during a morning walk 10 years ago.The nones India comes from an array of believe backgrounds, including Hindu, Muslim and Sikh. The …
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अयोध्या, 1992 / कुँवर नारायण
पद्मभूषण कुंवर नारायण की प्रसिद्ध कविता 'अयोध्या, 1992' जो भगवान राम को आज के दौर की सच्चाई पेश करती है।हे राम,जीवन एक कटु यथार्थ हैऔर तुम एक महाकाव्य!तुम्हारे बस की नहींउस अविवेक पर विजयजिसके दस बीस नहींअब लाखों सर - लाखों हाथ हैं,और विभीषण भी अबन जाने किसके साथ है।इससे बड़ा क्या हो सकता हैहमारा …
Did Rama eat meat, and why is it relevant to contemporary India?
What does the Valmiki Ramayana tell us about Non-Vegetarianism of its protagonist and deuteragonists?“Who controls the past controls the future. Who controls the present controls the past.” ~George Orwell (Ninteen Eighty-four)The Rāmāyana is the world’s second longest poetic composition, after another Hindu epic, the Mahābhārata. The mythological epic poem narrates the journey of Rāma, a …
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दापा प्रथा की कुंवारी मां
आदिवासी समाज की कम उम्र की तमाम लड़कियां दापा प्रथा के तहत अपने मरद का चुनाव कर लेती हैं और फिर उस के साथ बिना शादी के पतिपत्नी की तरह रहती हैं. राजधानी दिल्ली में जगमगाते इंडिया गेट के पास की एक सरकारी इमारत के एक कोने की ओट लिए सांवली सी लड़की बैठी थी. …
क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ?
भारत हमारा 'स्वतंत्र' देश । जिसके स्वतंत्र सुनने के आभास से ही हमारा मन हिलौरे भरने लगता है ,एक सपनों भरी उड़ान की धारा मन में बहने लगती है । काश ! यही सच होता और हम स्वतंत्रता के इस अनुभव को कुछ फिल्मी तरीके से ही सही ,कुछ समय के लिए उसमें समा सकते …
धर्म के बाज़ार में एक और नया पाखण्डी – धीरेन्द्र शास्त्री
हम जानते हैं कि फ़ासीवाद एक प्रतिक्रियावादी सामाजिक आन्दोलन है और इसने हमारे देश को अपने ख़ूनी पंजे में जकड़ रखा है| बेरोज़गारी, ग़रीबी, भुखमरी और भविष्य की अनिश्चितता से परेशान जनता के सामने नक़ली दुश्मन पेश करके उसे अन्धराष्ट्रवाद और साम्प्रदायिकता के ख़ूनी दलदल में धकेलने का काम किया जा रहा है| संघ परिवार …
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Unpacking the Rise of Atheism: How Science, Diversity, and Social Media are Shaping a More Secular Society
Atheism is defined as a lack of belief in a god or gods. This perspective is becoming increasingly common in many parts of the world, particularly in developed regions such as Europe, North America, and Japan. Several different factors are contributing to this trend towards a more secular society, including scientific advancements, diversity, social media, …

