फाॅर्स की जॉब में जितना कठिन जॉब लेना है उससे कही ज्यादा कठिन है उस नौकरी में बने रहना , जिसका सबसे बड़ा उदहारण है की रिकॉर्ड चेक करे तो 2019 से लेकर 2023 तक में bsf से 21680 , crpf से 12893 , आसाम राइफल से 5176 cisf से 3012 , itbp से 2281 ,ssb से 1738 मतलब 2020 से अबतक कुल टोटल 45000 के आसपास जवान वॉलेंट्री रिटायरमेंट ले चुके है , और इस साल अबतक के सबसे ज्यादा वॉलेंट्री रिटायरमेंट की तयारी है , जिसका कुछ प्रमुख कारन है जैसे की बचो से दूर रहना साल में 3 या 4 बार ही मैक्सिमम जवान छूती जा पाते है , और ऐसा नहीं है की इनकी जरूरते पूरा हुआ और ये जॉब छोड़कर छले गए जरूरते इंसानो की आखिरी दिन तक पूरा नहीं होता बल्कि सचाई तो ये है की फौज के जितने भी ड्यूटी के दिन होते है , वो हमेसा एक प्रेशर से भरे होते है 24 घटा में कभी भी कोईभी ड्यूटी करनी पड़ सकती है और ये टेंसन सभी को झेल पाना बहुत मुश्किल है फौज में ऐसे बहुत से लोग है जो 10 साल भी बड़ी मुश्किल से काट पाते है , एक फौजी कभी भी जब घर से फ़ोन आए है तो उसके मन में यही सवाल आता है सब ठीक तो है न , क्युकी उसे यही दर रहता है की कही कुछ परेशानी हुआ होगा तो घर कैसे जायेंगे लीव मांगने पे सबसे पहला डायलाग यही सुनने को मिलता है , अभी आदमि नाही है बाद में चले जाना , उसी टाइम से जवान ये गिनना सुरु कर देते है और कब तक नौकरी करना है , और इस प्रका का फीलिंग दिन में एक बार कही न कही से आ ही जाता है , जो बहुत ही पीड़ादायक होता है , हालाँकि लीव जैसे तैसे मिल ही जाता है लेकिन वो लीव लेने में जो पापड़ बेलने पड़ते है , वही ये एहसास दिला देता है की मेरा फ्यूचर कितना सही हाथो में है , उसी टाइम से लोग अपने जॉब के बचे हए दिन गिनने सुरु कर देते है , और सबसे बड़ी बात ये है की जब कोई आदमी कैंप से लीव लेकर बहार निकलते है तो उन्हें ऐसा लगता है की मेरी आज से लीव ख़तम होने तक आजादी है , तो इसका मतलब क्या हुआ जब वो कैंप में था , वो सभी समझ सकते है , ड्यूटी के दौरान कोई किसी को तंग या गुलाम जैसा बनाकर नहीं रखता है लेकिन सभी कैंप में ऐसा वातावरण सा बन जाता है जैसे आपकी दुनिया इस कैंप में सिमटकर रह गया हो जैसे की 7 बजे तक 70 % लोग भोजन करके आराम करने लगते है फिर जल्दी सोकर जल्दी उठो और फिर से यही सब रूटीन सुरु जल्दी खाना फिर ड्यूटी जाना फिर आना कही से तो जल्दी जल्दी काम ख़तम करके आराम करना , मेरा कहने का मतलब कोई परेशानी नहीं है लेकिन अगर किसी को बोला जाये केवल आराम करो तो क्या इसमें ही आपको एन्जॉय की फीलिंग महसूस हो जायेगा क्या जब भी कोई काम केलिए बहार जाना हो तो इससे पूछो उससे पूछो फिर कोई बोलेगा क्या काम है , तो इन सब कारणों की वजह से बहार का रास्ता सिर्फ लीव के टाइम ही दिखाई देता है , हालाँकि सच ये भी है की सभी को आदत हो जाता है , अब कारन जो भी लेकिन लगभग सब इस दिनचर्या में खोये रहते है , और बहुत से ऐसे लाइफ को एन्जॉय भी कर रहे है , तो दोस्तों अगर फौज में जाना है तो इरादे चटानो से भी मजबूत और हौसला आसमान से भी ऊँचा रखना होगा तभी इस लाइफ को एंजोय कर पाएंगे और अगर ऐसा लगता है की 24 घंटे की ड्यूटी आपके बस की बात नहीं है तो फौज में जाने की इच्छा न रखे बाकि अगर किसी को मेरा बात बुरा लगा हो तो माफ़ करे लेकिन मेरा जो लाइन गलत है उसे जरूर बताये की कौन सा लाइन सही नहीं है dhanywad………


जब पूरा देश पार्टी मनाता है तो देश के जवान और भी ज्यादा अलर्ट होकर ड्यूटी करते है 
