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फौजियों की मजबूरिया

फाॅर्स की जॉब में जितना कठिन जॉब लेना है उससे कही ज्यादा कठिन है उस नौकरी में बने रहना , जिसका सबसे बड़ा उदहारण है की रिकॉर्ड चेक करे तो 2019 से लेकर 2023 तक में bsf से 21680 , crpf से 12893 ,  आसाम राइफल से 5176  cisf से 3012 , itbp से  2281 ,ssb से 1738 मतलब 2020 से अबतक कुल टोटल 45000 के आसपास जवान वॉलेंट्री रिटायरमेंट ले चुके है , और इस साल अबतक के सबसे ज्यादा वॉलेंट्री रिटायरमेंट की तयारी है , जिसका कुछ प्रमुख कारन है जैसे की बचो से दूर रहना साल में 3 या 4 बार ही मैक्सिमम जवान छूती जा पाते है , और ऐसा नहीं है की इनकी जरूरते पूरा हुआ और ये जॉब छोड़कर छले गए जरूरते इंसानो की आखिरी दिन तक पूरा नहीं होता बल्कि सचाई तो ये है की फौज के जितने भी ड्यूटी के दिन होते है , वो हमेसा एक प्रेशर से भरे होते है 24 घटा में कभी भी कोईभी ड्यूटी करनी पड़ सकती है और ये टेंसन सभी को झेल पाना बहुत मुश्किल है फौज में ऐसे  बहुत से लोग है जो 10 साल भी बड़ी मुश्किल से काट पाते है , एक फौजी कभी भी जब घर से फ़ोन आए है तो उसके मन में यही सवाल आता है सब ठीक तो है न , क्युकी उसे यही दर रहता है की कही कुछ परेशानी हुआ होगा तो घर कैसे जायेंगे लीव मांगने पे सबसे पहला डायलाग यही सुनने को मिलता है , अभी आदमि नाही है बाद में चले जाना , उसी टाइम से जवान ये गिनना सुरु कर देते है और कब तक नौकरी करना है , और  इस प्रका का फीलिंग दिन में एक बार कही न कही से आ ही जाता है , जो बहुत ही पीड़ादायक होता है , हालाँकि लीव जैसे तैसे मिल ही जाता है लेकिन वो लीव लेने में जो पापड़ बेलने पड़ते है , वही  ये एहसास दिला देता है की मेरा फ्यूचर कितना सही हाथो में है , उसी टाइम से लोग अपने जॉब के बचे  हए दिन गिनने सुरु कर देते है , और सबसे बड़ी बात  ये है की जब कोई आदमी कैंप से लीव लेकर बहार निकलते है तो उन्हें ऐसा लगता है की मेरी आज से लीव ख़तम होने तक आजादी है , तो इसका मतलब क्या हुआ जब वो कैंप  में था , वो  सभी समझ सकते है , ड्यूटी  के दौरान कोई किसी को तंग या गुलाम जैसा बनाकर नहीं रखता है लेकिन सभी कैंप में ऐसा वातावरण सा बन जाता है जैसे आपकी दुनिया इस कैंप में सिमटकर रह गया हो जैसे  की 7 बजे तक 70 % लोग भोजन करके आराम करने लगते है फिर जल्दी सोकर जल्दी उठो और फिर से यही सब रूटीन सुरु जल्दी खाना फिर ड्यूटी जाना फिर आना कही से तो जल्दी जल्दी काम ख़तम करके आराम करना , मेरा कहने का मतलब कोई परेशानी नहीं है लेकिन अगर किसी को बोला जाये केवल आराम करो तो क्या इसमें ही आपको एन्जॉय की फीलिंग महसूस हो जायेगा क्या जब भी कोई काम  केलिए बहार जाना हो तो इससे पूछो उससे पूछो फिर कोई बोलेगा क्या काम है , तो  इन सब कारणों  की वजह से बहार का रास्ता सिर्फ लीव के टाइम ही दिखाई देता है , हालाँकि सच ये भी है की सभी को आदत हो जाता है , अब कारन जो भी लेकिन लगभग सब इस दिनचर्या में खोये रहते है , और बहुत से ऐसे लाइफ को एन्जॉय  भी कर रहे है ,  तो दोस्तों अगर फौज में जाना है तो इरादे चटानो से भी मजबूत और हौसला आसमान से भी ऊँचा रखना होगा तभी इस लाइफ को एंजोय कर पाएंगे और अगर ऐसा लगता है की 24 घंटे की ड्यूटी आपके बस की बात नहीं है तो फौज में जाने की इच्छा न रखे  बाकि अगर किसी को मेरा बात बुरा लगा हो तो माफ़ करे लेकिन मेरा जो लाइन गलत है उसे जरूर बताये की कौन सा लाइन सही नहीं है dhanywad………   

 

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soldier trening life problem in hindi

जब भी कोई स्टूडेंट  काफी  मेहनत के बाद जब फौज ज्वाइन होता है , तो उसके मन में कई प्रकार के सवाल घूमता है ,  अपने आप पे कभी गर्व महसूस होता है तो कभी डर महसूस करता है , वो कई प्रकार  के उलझन में रहता है , लगभग सभी को  ऐसा महसूस होता है ,

             और  जो लोग  बाहर से फाॅर्स की लोगो को देखते है उनका मन में यही ख्याल आता  है की यूनिफार्म में सबकुछ चकाचक लग रहा है , लाइफ अछि से काट रहा है सरकारी यूनिफॉर्म , बेल्ट , टोपी , राइफल  बढ़िया बढ़िया गाड़ी में घूमना ये सब देखने में मस्त लगता है  , उन्हें लगता है  की जीवन  की टोटल  तकलीफ  समाप्त हो गया है , लेकिन ऐसा नहीं है फाॅर्स की लाइफ जितना देखने में मस्त लगता है  उतना है नहीं  , जिस  दिन कोई सिविलियन  कोई फाॅर्स ज्वाइन करता है  , उसी  दिन से उसकी खुद की आजादी लगभग समाप्त हो जाता है , उसका खुद का सारा आदत चेंज करना पड़ता है , कोई भी फौजी अपनी मस्ती से देर सुबह तक  नहीं सो सकता , कोई भी जवान जैसे घर में लेट नहाना खाना और घूमना फिरना कुछ भी नहीं  कर सकता मेरा 11 साल का करियर में अबतक ऐसा नहीं हुआ की हम कैंप में  हो और अपनी मर्जी से लेट तक  सोकर उठे हो , या कही भी अपने मन से घूमने फिरने नहीं  जा सकते है , फाॅर्स की जॉब सभी लोग नहीं कर सकते है , जब कोई सिविलियन फौज की ड्यूटी ज्वाइन करता है तो जैसे ही ट्रेनिंग सुरु होता है वैसे ही ढेर सरे परेशानिया एक सात सुरु हो जाता है जैसी  की  सुबह जल्दी उठना  , उठकर जल्दी सी ब्रश करना ढाढी बनाना नहाना  और ये सब करवाई सुबह 5 बजे के पहले ही कम्पलीट करना होता है  , क्युकी फाॅर्स में सभी  लोगो को कोई निर्धारित जगह पे एकत्रित होकर मार्का लगाया जजता है  , उससे  पहले जितने भी ट्रेनीज होते है उनका काम होता है ट्रेनिंग एरिया की साफ सफाई और सभी का पर्सनल हथियार और जितने भी ट्रेनिंग की जरुरत वाली चीजे होती है वो सब  मार्का से पहले ट्रेनिंग वाले जगह पे निकला  हुआ होना चाहिए , जो  की कोई  भी सिविलियन केलिए पहले ही दिन से  ये सारा काम आसान   नहीं होता है ।   और ऐसा कोई ऑप्शन नन्ही होता है की आप ये सब  काम को न करे , आपको चाहेजितना  भी तकलीफ हो आपको ये सरे काम करने ही होंगे ,अगर  आप एक भी दिन गलती से सुबह लेट तक सोते रह गए और सुबह का मार्का में नहीं पहुंचे तो आपको भरी पनिशमेंट मिलेगा जिसके वजह से कोई भी जवान अपनी  टोटल काम समय पे कर लेते है  , फौज  की परेशानी केवल ट्रेनिंग  नहीं होती है ट्रेनिंग के सिवाय भी ऐसे कई परेशानी है जो ट्रेनिंग से ज्यादा तकलीफ देह होते है , जैसे कही भी ट्रेनिंग आप करोगे तो वह कमसे कम  300 बन्दे होते  है जिनका एक साथ ट्रेनिंग होता है , ऐसे  में  जब  90 मिनट ट्रेनिंगग के बाद सबको एक साथ छोरा जाता है , जिसमे सरेलोग एकसाथ नास्ता केलिए भागते हुए जायेंगे जिसमे 90 मिनट की ट्रेनिंग के बाद ड्रेस पूरी तरह से धूल मिटी से भर जाता है , लेकिन ट्रेनीज को 45 मिनट के बाद उन्हें ट्रेनिंग की अगली क्लास केलिए मिलना होता है , और अगर आप अगली क्लास केलिए मिलने में लेट हुए तो भी सभी के सामने आपको दण्डित किया जायेगा , तो फाॅर्स के कुछ ऐसे नियम है जिसे पूरा करना बहुत कठिन होता है , और ये सारा परेशानिया सिर्फ 1 या 2 दिन की नहीं की होती है , बल्कि पुरे ट्रेनिंग में यही नियम चलता है जो की 44 वीक का होता है , बस ये मान  लीजिये की तकलीफ ख़तम नहीं होता है , लेकिन इन तकलीफो को झेलने की आदत हो जाता है ।

ट्रेनिंग के टाइम की परेशानिया

1. नया  वातावरण – किसी भी इंसान को अचानक से नयी लोगो के बिच अपने आप को सेट करना पड़ता है , जिन्हे  आप जानते नहीं है   , की  किसका कैसा आदत है उन लोगो को के साथ रहना पड़ता है जहा पे भरी तादाद में भारत के अलग अलग राज्य से लोग आते है , फौज में कुछ अजीब से सिस्टम भी है जो आप आपने हिसाब से देखिये सही है या गलत फौज में कोई एक भी गलती करता है तो सजा सब को मिलता है , और ये नियम अंग्रेजो के टाइम से चलता आ रहा है ,

2 – कड़क डिसिप्लिन – फौज  की लाइन में  एक कहावत है की ड्यूटी तो होता रहेगा पहले तुम्हारा डिसिप्लिन ठीक करना है , और जब ये डायलाग किसी को बोला जात्ता है तो सब समझ जाते है अब उसके साथ क्या होनेवाला है , फौज में सबसे ज्यादा अगर कुछ फॉलो होता है तो वो है डिसिप्लिन जिसे सुनने में तो कुछ खाश नहीं लेकिन फॉलो करने में पसीने निकल जाते है , इतना बड़ा फौज को सुचारु रूप से हैंडल करने में डिसिप्लिन का अहम् रोल होता है , फौज में कोई भी काम करना होता है तो ये जरुरी होता है की काम को डिसिप्लिन के दायरे में ही पूरा किया जाए    

3 – कमांड और पनिशमेंट का डर – जब भी कोई ट्रेनीज किसी भी प्रकार का काम करता  है जो सीनियर के कमांड के खिलाफ   है , तो  उसे पनिशमेंट दिया जाता है , ट्रेनिंग  में बहुत से ऐसे आदेश मिलते है जो मन में डर पैदा करता है की हम  इसे कर पाउँगा की नहीं

4 – फिजिकल कठिन वर्क – ट्रेनिंग में कई बार ऐसा होता है की पूरी दिन की ट्रेनिंग के बाद रत में भी देर रात तक बैठा कर क्लास लिया जाता है , जिससे जवानो को बहुत ज्यादा दिकत का सामना करना पड़ता है , ट्रेनिंग में हर हफ्ता को फिजिकल टेस्ट होते रहते है जैसे लॉन्ग रनिंग , लॉन्ग जम्प , हाई जम्प , मंकी  रोप , सिटप , पुश उप  

5 – ड्रिल की लम्बी क्लास – सुबह के एक्सरसाइज के बाद नास्ते कएने के तुरंत बाद से ही ड्रिल की क्लास सुरु हो जाती है , जिसमे जवानो को एक साथ चलना फुर्ती से एक साथ कदम आगे निकलना सलूट मारना ये सब सिखाया जाता है  

6 – घरवालों  की याद – फौज  में सबसे ज्यादा हमको परेशानी लगता है की घर वालो से दूर रहना पड़ता है , सारा दिन का शेडूल ग्राउंड की होती ऐसे में जब जवान थकहारकर आराम करने जाता है तो बिस्तर पे जाते ही जवानो को नींद आने लगता है और वो सो जाते है , जिसके  कारन जवान अपने घर वालो से काफी दिनों तक बात भी नहीं कर पाते है 

to तो दोस्तों अगर आप फौज ज्वाइन करना चाहते है , तो सबकुछ सोच समझकर ही ज्वाइन करे मेरे ऐसे काफी दोस्त है जिन्होंने फौज तो ज्वाइन किया लेकिन कुछ महीनो में ही जॉब छोड़कर घर वापस  आगये है इस प्रकार के मामले यूट्यूब पे अवेलेबल है आप वह जाकर भी समझ सकते है , अभी पिछले साल ही कॉन्स्टले उत्तम कुमार ने हमारे कंपनी से रिजाइन मरकर गया है ।

                                                                                                               दोस्तों  यहाँ तक पढ़ने केलिए दिल से धन्यवाद ।

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CAPF JAWAN PENSION ISSUE

 

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देश  के जवान की ड्यूटी सिर्फ एक जॉब नहीं है बल्कि  जवान की ड्यूटी हमेसा  जान की खतरों  से झुझता रहता है , पैरामिलिट्री जवान हमेसा आतंकरोधी ऑपरेशन  या  नक्सल विरोधी अभियान करते रहते है , हर समय  पैरामिलिट्री जवान  अपने और अपने घर  वालो से आगे देश की सुरक्षा को  रखते   है  , 

लेकिन एक सवाल है  जो मेरे मन में बार बार आता है क्या  जितना ईमानदारी से पैरामिलिट्री जवान अपने देश और देशवासियो के सेवा के प्रति हर समय  जागरूक है ,  उतना ही जागरूक देश के  सरकार हम जवानो के प्रति है ?

  जो जवान देश केलिए  अपना सबकुछ निछावर कर देते है उन्ही जवानो के प्रति हमारे  देश के मुखिया उनके  सेफ्टी को शेयर मार्किट के भरोसे छोर देते है , यानि की देश की जवानो और उनके परिवार का  फ्यूचर  NPS और  UPS  के तहत जबरदस्ती थोपा जा रहा है , जिसे हम सारे जवान अपने फ्यूचर को जोखिम में देखकर  अत्यधिक परेशान और चिंतित है , 

जिन हाथो ने देश की सीमाएं को मजबूत किया हो  , मासूमो को मिलिटेंट से बचाये हो , आज वही हाथ अपनी पेंशन केलिए अदालतों के चक्र्र काटने को  मजबूर है ,

दिल्ली हाईकोर्ट ने जब न्याय दिया , तो हम सारे जवानो में  खुसी की लहर दौड़ गयी थी हर जवानो को अपने और अपने परिवार का फ्यूचर सेफ  देखकर सभी खुशनुमा हो गए ,

लेकिन तभी सारे  जवानो  की खुसी मातम में तब बदल गया जब सभी को पता चला की सरकार ने दिल्ली हाइकोर्ट के पेंशन के फैसले के खिलाफ सुप्रीम  कोर्ट में चले गए , हमारी खुसी की तारीख थी 11 january 2023 , जिसमे हाइकोर्ट का ये  फैसला था की केंद्रीय अर्धसैनिक जवानो  को पुराणी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए , और जवानो केलिए दर्दनाक पल था 5 जुलाई 2023 जिस दिन  हाइकोर्ट के वो पेंशन वाली आदेश पे रोक लगा दिया ,

  लेकिन सच ही कहा है किसी ने की  बुरे नियत से किया गया काम में कोई न कोई कमी रही जाती है , जिस   NPS   को हमारी लचर सरकार  जबरदस्ती थोपना चाहती है , वो  जल्दबाजी में ये भूल गए की जो  22 दिसंबर का नोटिफिकेशन NPS केलिए लाये थे  उसमे फर्स्ट पैराग्राफ में ही ये साफ साफ लिखा हुआ है की  ये नियम देश के सस्त्र बल पे लागु नहीं होंगे , और  भारत के संविधान में भी पेंशन के हक़ के पक्ष में अलग से प्रावधान  बनाये हुए है , फिर भी हमारे देश के  सरकार कोई न कोई तिगड़म लगाकर जवानो को पेंशन से वंचित रखना चाहता है , जो खुद 1 दिन का भी अगर मंत्री पद पे रहे हो तो पेंशन के हक़दार बन जाते है  और जवानो को जो  पूरी जिंदगी देश की सेवा में बिता देता है उसे  nps  और यूपीएस के फायदे समझाने की कोसिस करते है

आज लाखो पैरामिलिट्री जवान ये सवाल कर रहे है की जब सरकार खुद हमें ससस्त्र बल मान  रही है , जब  गजट नोटिफिकेशन और अदालत का फैसला हमारे पक्ष में है , तो  फिर हमें पुराणी पेंशन से वंचित क्यों रखा जा रहा है , ये मामला अब केवल पेंशन का नहीं , बल्कि न्याय , समानता और जवानो से जुड़ा हुआ बन चूका है .

  सिमा पर जवान का कोई कोर्ट नहीं होता ,

  वो आदेश मनता है – सवाल नहीं करता है ,

   मगर जब जवान इंसाफ मांगता है ,

   तो सरकार कहती है चलो सुप्रीम कोर्ट चलते है    

 

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DUTY OF CRPF

 

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CRPF एशिया की  नंबर 1 फौज है ,  crpf  की टोटल तादाद 330500 के आसपास है जिसमे से अभी 3 लाख से ज्यादा लोग इस बल में सम्मिलित है , बाकि की भर्ती पूरा करने केलिए एसएससी जीडी  2025 की भर्ती में रिक्त पदों केलिए ऑनलाइन ऍप्लिकेटोंन ले लिया गया है

CRPF  की प्रमुख ड्यूटी  ।

CRPF  की  ड्यूटी  देश  की आंतरिक सुरक्षा और कानून ब्यवस्था को  बनाये रखना है जिसमे  हर प्रकार  की ड्यूटी जैसे आतंकी एरिया में आतंक विरोधी अभियान चलना  , जो की  बहुत  ही सावधानी पूर्वक अपनी पुरे टूप्स को हिफाजत के साथ  आतंकियों को खोजने  तथा उनको   मारने का काम  करते है  , इस  अभियान को पूरा  करने  में कभी कभी जवानो को  कई दिन तक लगातार ऑप्स एरिया में सर्चिंग करना पड़ता है जिसमे कई प्रकार के समस्या का सामना करना पड़ता है  , जैसे जब कभी ज्यादा दिन तक लगातार मिलिटेंट  की सर्चिंग कर रहे होते है तो  उस टाइम जवानो के रहने का सही जगह नहीं मिलता  है तो ऐसे में ज्यादातर जवान जंगल में ही पेड़ और  पहाड़  के आड़ लेकर  अपनी  टूप्स की मदद से  ही  जंगल में ही जैसे तैसे कैंप लगाकर रात गुजारते  है , और उस टाइम  देश के जवान बिना कुछ खाये  पिए भी  रह  लेते है 

जंगलो में जंग  नक्सल बनाम  CRPF.

नक्सल  विरोधी अभियान : देश के अंदर से  ही   कुछ भटके  हुए लोग जो नक्सल  में तब्दील हो गए  है , जो  देश   के बिकाश  में वाधा डालने की कोसिस करते है , और ऐसे में अपने ही देश के जवानो पे छुप कर हमला  करते है ,  तो ऐसे में इनसे भी निपटने केलिए  नक्सल विरोधी अभियान  देश के जवान   crpf  द्वारा चलाया जाता है  , ऐसे में कई बार हमारे जवानो के बहुत बड़े बड़े नुकसान  भी हुए है जैसे  की अबतक का सबसे बड़ा कांड  6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में crpf  की 62 बटालियन  की एक कंपनी एरिया डोमिनेशन पे निकली हुई थी उस टाइम पे घाट लगाकर बैठे हुए नक्सलि जो की लगभग 1000 लोग थे  , वो सब ने रास्ते  में ही लैंडमाइन बिछा कर रखे थे  , जवान जब लैंडमाइन के दायरे  में आये  उसी टाइम  नक्सली लोगो ने अचानकक से फायरिंग  सुरु कर दिया और चारो तरफ से घेरकर और प्लान बनाकर जव्वानो की बेरहमी  से  हत्या कर दिया  ,  

  इस हमला के कुछ ही दिन बाद  नालियों ने फिर से 17 मई 2010 के दंतेवाड़ा  में एक और नक्सली हमला को  अंजाम दिया  , जिसमे जवानो को जा रहे ड्यूटी वाली गाड़ी में   IED ब्लास्ट किया  उस हमला में भी तक़रीबन  दर्जनों जवान अपनी जान गवा दिए  । इस  प्रकार के कांड अबतक कई बार  हो चुके है  जिसमे सैकड़ो जवानो को  अपनी जान गावनि पड़ी है  , तो इस प्रकार  जवानो  की ड्यूटी देश के बाहर के दुश्मनो के साथ  साथ देश  के अंदर के दुश्मनो से भी लड़ना पड़ता है ।

सुरक्षा और एस्कॉर्ट ड्यूटी 

  . जब भी  कही किसी बड़ा  समारोह या उद्घाटन या बड़े नेताओ का कही आना जना होता  है तो ऐसे में  crpf  की जवान (ROP) रोड ओपनिंग पार्टी लगाते है , ताकि  किसी भी प्रकार  कोई हमला न कर सके और  कही लैंडमिने जैसी बड़ी घटना को अंजाम न दे ।

CRPF की कुछ बटालियन  को कोबरा  बटालियन बनाना।

बहुत ही ज्यादा नक्सली घोसित एरिया में उनसे निपटने केलिए  कुछ बटालियन को कोबरा बटालियन में तब्दील कर दिया गया है , जिनका प्रमुख कार्य नक्सली को खोजना  और उन्हें समाप्त करना है , कोबरा  बटालियन को स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग दिया जाता है जिसमे  पहाड़ी एरिया में छुपे नक्सल से भिड़ने की तयारी कराई जाती है । जिसमे आधुनिक   प्रकार के हतियार और बम  बिस्फोटक हथियारों की ट्रेंनिंग दिया जाता है ।

    इलेक्शन ड्यूटी।।

CRPF की इलेक्शन ड्यूटी भी बेहद इम्पोर्टेंट ड्यूटी मणि जाती है , जिसमे आजतक जिस प्रकार से चुनाव से लोगो का  बिस्वास उठते जा रहा है , ऐसे में  यही जवान है जिसपे पूरी  देश के लोगो को चुनाव की बिस्वनियता   बनाये रखने में अबतक  सक्छम है , देश में कही भी  चुनाव होत्ता है तो  crpf को पका बुलाया जाता है ।

vip बटालियन  की ड्यूटी ।

   देश  के बड़े  बड़े मंत्रियो की  सुरक्षा कीजवाबदारी भी  crpf के  VIP बटालियन  की होती है  

camp सिक्योरिटी।

jwano की खुद की कैंप की सिक्योरिटी भी crpf के   जवान  ही करते है ,  

 

 

 

 

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ssc gd 2026 crpf constable total pay and facilities.

  एसएससी जीडी   CRPF 2026 में मिलने वाली टोटल वेतन और सुविधाएं।

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  एसएससी जीडी  2026  CRPF  में मासिक वेतन के साथ कई प्रकार के अलाउंस  मिलते है जैसे की रिस्क अलाउंस , हिल अलाउंस , राशन मनी , महंगाई भाता , ट्रेवल अलाउंस , स्पेशल  ड्यूटी  अलाउंस , वर्दी अलाउंस जैसे जितने भी अलाउंस मिलते है उन सभी  का डिटेल फुल बिस्तार से चर्चा करते है ।

  एसएससी जीडी 2026 में   crpf   का टोटल वेतन उसके डेप्लॉयमेंट पे डिपेंड करता है जैसे 2025 की भर्ती में 2 लोग एकसाथ भर्ती हुए और एक का  पोस्टिंग असामं में हुआ और एक का भर्ती श्रीनगर में हुआ तो दोनों का  पेमेंट  अलग अलग होगा क्युकी असामं की  रिस्क अलाउंस 7600 है  और श्रीनगर का रिस्क अलाउंस 21600 तो ऐसे ही हर जगह का वेतन में डिफरेंस होता है ,

अब बात करते है तो टोटल वेतन  की तो सबसे पहले  जो एसएससी जीडी  2025 में भर्ती होंगे उनके बेसिक  होगा 7th pay  के हिसाब से 21700 तो उसमे ऐड करते है श्रीनगर के हिसाब से क्युकी ज्यादातर CRPF की  पोस्टिंग  श्रीनगर साइड में  होता है , और  जो नए भर्ती होते है उनका तो बहुत ज्यादा चांस है की उनकी फर्स्ट पोस्टिंग श्रीनगर में  ही होता है  , तो उस  हिसाब से अगर टोटल वेतन को जोड़ा जाये तो 21700 बेसिक +9 परसेंट   होम रेंट  अलाउंस -1953, रिस्क अलाउंस -21600, राशन   मनी -4710 , डीआरनेंस अलाउंस 58 %-12586 , रम अलाउंस -310 , सोप टॉयलेट अलाउंस -56 , हेयर कटाई अलाउंस -56 , टोटल =  62971  रुपया जोइनिंग वाले माह से ही आना सुरु हो जाता है ,

इसके सिवाय  और भी पेमेंट है जैसे अगर कही चुनाव ड्यूटी में जाते है तो उसका एरिया के हिसाब से अलग से वेतन दिया जाता  है  , और जुलाई महीना  का  वेतन में वर्दी अलाउंस अलग से 12000 दिया जाता है , और  इसके सिवाय  जब 3 साल बाद जब टेन्योर पूरा करने के बाद ट्रेवल अलाउंस अलग से दिया जाता है जो की लगभग 20000 होगा 

  वेतन  की सिवाय और भी सुविधा अवेलेबल है , जैसे जवान की  लीव के टाइम फ्री ट्रैन टिकट 3rd क्लास , फ्री बाल  काटना , फ्री बिजली , फ्री पानी , फ्री कॉब्लर सुविधा , इस प्रकार की सारे  सुविधा जो किसी भी इंसान को चाहिए वो सारे सुविधा अवेलेबल है  , और जो डेली की जरुरत जैसे सोडा ,साबुन , सर्फ़, कपडे , बैग्स , खाने पिने की वस्तुए ये सब केलिए कैंप में ही  कैंटीन अवेलेबल है , जो  की  बाजार की कीमत से काफी सस्ता होता है और खाने पिने केलिए जैसे मीठा नमकीन चाय समोसा जलेबी  केलिए भी वेट कैंटीन सारे कैंपो में अवेलेबल है

फौज की पेमेंट और सुख सुविधा  जगह के हिसाब से चेंज हो  जाता है  जैसे की अगर आपकी पोस्टिंग  नई दिल्ली में है तो वहाँ  पे फर्स्ट  होम रेंट अलाउंस मिलता है , और दिल्ली के कुछ बटालियन में फर्स्ट  TA  मिलता है , जिससे जवान की मासिक वेतन में बहुत बदलाव आ जाता है  ,  और जो जवान की पोस्टिंग j$k में है उनको लीव जाने के टाइम  श्रीनगर तो जम्म्मू  मुफ्त हवाई जहाज  टिकट मुहैया कराया जाता है

और जब जवान की पोस्टिंग ईयर होता है उस ईयर जवान को 10,12 और 15  दिन की  एक्स्ट्रा लीव बटालियन की दुरी के हिसाब  से मिलता है , और जिस भी ईयर जवान पिता बनने वाले होते है उस ईयर  जवान को 15 दिन की एक्स्ट्रा लीव मिलता है , जवानो को और भी कई प्रकार के लीव मिलते है , उनके अलग अलग कंडीशन है उसके बारे में एक अलग ब्लॉग में डिस्कस  करेंगे    ।

जय हिन्द ।

     

 

 

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देश केलिए वर्दी पहनने का सबसे बड़ा मौका

दोस्तों 2026 की आगाज  हो चूका है , ऐसे  में सबसे पहले आप सभी को  मेरे तरफ से हैप्पी नई ईयर   

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नया साल खुसिया लेकर आये , यही  हमारा  कामना है

 लेकिन आपसे बस इतना अनुरोध है ,

देश की शांति बनाये रखे , कानून का  सामान करे ,

ताकि हम सीमाओं पे निडर होकर आपकी रक्षा कर सके    

***

हम  सरहद पर है ताकि आप सुकून से रहे ,

नए साल में एक दूसरे का सामान करे ,

बुजुर्गो का सामान करे ,

                                                                                              और देश के जवानो के बलिदान  को न भूले ।

***

बीते साल की यादे साथ रहे ,

नए साल  में अपने आबाद रहे ,

खुसियो से भरी हो जिंदगी आपकी ,

हर दिन यही शानदार रहे।

दोस्तों 2026 की ये साल  सच में युवाओ केलिए हैप्पी हैप्पी न्यूज़ लेकर आयी है , जो युवा देश की वर्दी की सपना देखे है उनके लिए ये साल से बढ़िया मौका हो ही नहीं सकता , क्युकी  इस बार  फौज में भर्ती होने केलिए सबसे बड़ी भर्ती  आयी है , जो  एसएससी जीडी 2025 को अप्लाई किये थे , उनके  लिए बड़ी खबर ये है की  इस बार की भर्ती  को को बढ़ा दिया गया है , तो ऐसे में ज्यादा उम्मीद है की  इस बार ज्यादा से ज्यादा युवाओ को फौज में शामिल होने का मौका मिलेगा  एसएससी जीडी 2025 की भर्ती  सुरु में 25487 अलॉटेड सीट थी , जिसे  बाकि फौज की रेक़ुएमेंट के हिसाब से  बढाकर 53690 पद कर दिया गया है ,

जिसमे BSF – 16371 , CISF-16571, CRPF-14359, SSB-902 , ITBP-3468, ASAM RIFLE-1865, SSF -132, NCB-22 TOTAL- 53690.

दोस्तों अगर आपको  अगर इस बार  सिलेक्शन लेना है तो कुछ बातें  है , जो पहले ही आपको तय  करना होगा जैसे की सबसे इम्पोर्टेन्ट  है इसमें  सुरु पे पढाई जैसा की आपलोग को पता है की अब एसएससी जीडी की एग्जाम में भी बाकि एग्जाम  की जैसा रिटेन एग्जाम  पहले होता है तो उस हिसाब से सबसे ज्यादा जरुरी  है की आप लगातार पढाई करे  और एक सेलेबस के हिसाब से पढ़े जैसे मैंने जयादातर लोगो को देखा है की पढाई तो ठीक ठाक  कर लेते है , लेकिन  वो क्या गलती करते है ज्यादा से ज्यादा सिर्फ जनरल नॉलेज की पढाई करते है और जो सबसे ज्यादा जरूरी है मैथ्स उसे इग्नोर करते रहते है तो दोस्तों ऐसे गलती नहीं करनी है आप पढ़ने की शेडूल बनाइये 

जैसा की एग्जाम का पैटर्न इस प्रकार है जेनेरल नॉलेज कुल सवाल  80 , कुल   मार्क्स 160, समय  60 मिनट  ।

  जनरल नॉलेज – पिछले साल से अबतक की टोटल अफेयर्स , स्थैतिक नॉलेज , संविधान , रास्टीय पर्व , सेना  की    गौरव कथा , नदियों के नाम  , स्पेशल  डे   , देश के पहला और आखिरी बड़ी उपलब्धि , राम  मंदिर से जुड़े तथ्य , कोरोना  का टोटल अपडेट ।

हिंदी / इंग्लिश – आपकी  जो मजबूत है हिंदी या इंग्लिश उसपे ध्यान दे , ज्यादातर लोग हिंदी को हलके में लेते है और उसी में फ़ैल होते है , मेरे  साथ जो एग्जाम दिया था डिपार्टमेंटल में उसे 118 नंबर  था वो फ़ैल , और  मेरा 105 और में पास कारन 118 वाला हिंदी में 2 नो से फ़ैल हो गया , तो  अगर आपको अपनी फ्यूचर सवारना  है तो इस सब्जेक्ट  को हलके में न ले

  मैथ्स- इसमें ज्यादातर लोग ये गलती करते  है की  वो बहुत ज्यादा एडवांस की तयारी करते है , और  सवाल नार्मल आता है , तो  बहुत ज्यादा डिप्ली न जाये सिंपल सवाल की तयारी करे , प्रीवियस ईयर पेपर कोसिस करे , ज्यादा से ज्यादा प्रतिसत , औसत , अनुपात, साधारण ब्याज , समय और  काम , मैथ ज्यादा से ज्यादा कोसिस करे

रीजनिंग   — सीरीज  , कोडन – डिकोडिंग  , ब्लड  रिलेशन , डायरेक्शन

  दोस्तों ये टॉपिक पे ज्यादा से सवाल आते है बाकि सभी टाइप की तयारी करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा

और इसके साथ साथ डेली सुबह में रनिंग प्लस एक्स्ट्रा एक्सरसाइज जैसे हाई  जंम्प , लॉन्ग  जंम्प और कमसे काम 45 मिनट एक्सरसाइज रोज करे

, बाकि फिजिकल एग्जाम कैसे तयारी  करे , उसके  बारे    में अगले ब्लॉग में  बताएँगे ।

तो अगर आपको और कुछ जननाना हो तो कमेंट करके पूछ सकते है , बाकि  में ईश्वर  से आपकी सफलता की दुआ करूँगा ।  

 

 

 

 

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while the world celebrates,the jwan stands on duty

Imageजब पूरा देश पार्टी मनाता है तो देश के जवान और भी ज्यादा अलर्ट होकर ड्यूटी करते है

आज के दिन ज्यादातर लोग इकठा होकर पार्टी धुम्म धड़का करते है ज्यादा से ज्यादा लोग एकत्र होकर 31 दिसंबर की बिदाई और रात 12 बजे के बाद नई ईयर स्वागत करते है जिसमे फॅमिली और फॅमिली के सभी लोग मिलकरर म्यूजिक बजाते है और डांस करते है पूरा एरिया खुशनुमा रहता है , सभी के दिल में एक नयी उमंग होता है , और सबके मन में यही भगवन से प्राथना होता है की भगवन ये पूरा साल हमारा अच्छे से बीतने चाहिए
जब पूरा देश पार्टी मना  रहा होता है लोग उस टाइम ये भूल जाते है की जहा पूरा देश आज एन्जॉय कर रहा है वही पे हमारे देश के जवान बॉर्डर पे हमारे ही सुरक्षा केलिए पहले से और ज्यादा अलर्ट होकर ड्यूटी करते है , जहा पूरा देश पार्टी मना  रही होती है जहा सब लोग मिलकर म्यूजिक और डांसिंग कर रहे होते है वही देश के जवान अपनी जान हथेली पे रखकर आतंकी एरिया में गश्त कर रहे होते है , देश के जवान भी इंसान ही होते है उनके मन में भी घर जाकर अपने घर में अपने परिवार के साथ सम्मय बिताने औरनई साल मानाने का इक्छा होता है , लेकिन उनके लिए सबसे जरुरी होता है देश और देशवासी
जवानो का दुःख
जब भी 31 दिसंबर आने वाला होता है तब्ब देश के जवान भी चाहते है की वो अपने घर पे परिवार के साथ एन्जॉय करते , दोस्तों के साथ कही बाहर जाकर दिन को खाश बनाते लेकिन उनकी सबसे मज़बूरी होती है की जिस दिन कोई खाश दिन होती है उस  दिन सिक्योरिटी भी बाकि दिन की अपेक्षा खाश ही होती है इसीलिए 31 दिसंबर हो होली हो दिवाली हो दुर्गापूजा हो ईद हो जैसे खाश दिन पे बहुत ही मुश्किल से उस दिन जवानो को छूती मिलती है क्युकी ऐसे खाश दिन में ज्याददातार लोग यही चाहते है की हो इस खाश दिन को अपने घर वालो के साथ मनाया जाये , लेकिन ऐसे खाश दिनों में देश के दुसमन भी घात लगाकर बैठे होते है की कैसे देश में किसी खाश खुसी वाले दिन को मातम में बदल दिया जाये ,यही सब देखते हुए देश के जवानो को दुखी होकर ज्यादातर खाश दिनों पे घर से बहार ही बिताना पड़ता है लेकिन जवान तब भी भले ही दुखी होकर करे लेकिन ड्यूटी  में कोई भी कमी नहीं होने देते है जवानो की दुःख इतना से ही ख़तम नहीं होता है जब्ब लोग पार्टी  करके नींद से सो जाते है तो जवान बेचारे नींद आने के बाद भी  सोते नहीं है वो वही अपनी आँखों में नींद लेकर भी जगे रहते है और अगर बाद में सोते भी है तो पूरी नींद किये बिना ही अगली दिन फिर से पूरी तरह सुबह होने के पहले ही ड्यूटी केलिए चले जाते है , ऐसे समय में तो उन्हें ठीक से खाना भी खाने को नहीं मिलता है ,
जवान अक्सर बोलते है कोई बात नहीं ड्यूटी है बाद में आराम कर लूंगा
जहा लोगो की सिर्फ 8 घंटे की ड्यूटी होती है वही हमारे देश के जवान लगातार 12 से 15 घंटा या कभी कभी तो इससे भी ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ती है , ऐसे में जवान न तो ठीक से आराम कर पाते है और नहीं ठीक से खाना खा पाते है , जवान नींद में होते हुए भी अपने देश के फर्ज के प्रति ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाने में थोड़ी भी संकोच नहीं करते है , वो चाहे आराम न कर्रे , या ठीक से भर पेट खाना भी नहीं खाये हो लेकिन उनका सिर्फ एक ही मकसद होता है की उनका देश और देशवासी सेफ रहे , जब जवान ड्यूटी पे होते है जब उन्हे कोई बोलता है आराम कर लीजिये तो चाहे जितनी भी थके क्यों न हो वो सिर्फ इतना ही बोलते है की बाद में आराम कर लेंगे
जवानो की फिर भी कोई शिकायत नहीं होती है
जब जवान लगातार ड्यूटी करने के बाद अपने कैंप पे पहुंचते है तो आराम करने से पहले ये मैसेज मिल जाता है की आपको एक मिशन पे जाना है , तो ऐसे में जवानो के दिल में दर्द बहुत होता है लेकिन देश के फर्ज के आगे हमेसा झुकना पडत्ता है और बिना किसी संकोच के जवान खुसी का एहसास दिलाते हुए चले जाते है , वो ऐसे समय को भी बहुत ही आसानी से झेल जाते है वो अक्सर यही बोलते है कोई बात नहीं सर बाद में आरम्म कर लेंगे , जवानो को कितना भी ड्यूटी करना पड़े वो खुसी खुसी ड्यूटी करते  है उनकी कभी शिकायत नाही होती है
जवानो के परिवार भी बहुत जवानो जैसा ही बहुत ज्यादा दर्द झेलते है
जब महीनो तक जवान घर से बहार रहते है तो ऐसे में उनके घर वाले भी बहुत ही ज्यादा दर्द झेलते है , जब किसी खुसी का माहौल होता है उस टाइम घर वालो की भी इच्छा होती है की वो भी अपने भाई बचा या पति के संग रहते तो खुसी ज्यादा होती , जब्ब जवान के घर पे उनकी पत्नी दुसरो को सजते सवारते देखते है तो इनके मन में भी यही ख्याल आता है की काश उनके पति घर पे होते तो खुसी का माहौल ज्यादा होता , ऐसे में उनके घर वालो की दुःख का एहसास किसी जवान की पत्नी को ही हो सकता है , कभी कभी तो ऐसे टाइम में पत्नियों का जवान लोग ड्यूटी पे होने की वजह से फ़ोन भी उठा नही पते है क्युकी जवानो को ड्यूटी में फ़ोन रखना माना है
इन दुखो को झेलने के बाद भी जवान हर हाल में देश की सुरक्षा करते है उनकी केलिए देश और देशवासी से बड़ा कोई नहीं होता है , उनके लिए परिवार से पहले देश आता है
घर में जश्न की रौशनी थी ,
और सरहद पे रत अँधेरी थी
हम हस्ते रहे अपनों के संग ,
वहाँ जवान की आँख नाम थी ।

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VIRAL BOY DHOOMM TAILENT THAT TOUCHED MILLIONS”KRISH KA GANNA SUNEGA”

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Someone has truly said that talent never remains hidden; sooner or later, it comes to light in some form. A similar example of such talent has been seen in our country recently. A boy who was earning his livelihood by collecting garbage suddenly became famous overnight on all social media platforms. People know him by the name ‘Dhoom,’ but his real name is Pintu Prasad. He is a resident of Jamshedpur, Jharkhand.

He lost his parents at a very young age, due to which there was no proper development or guidance in his life. Somehow, he managed to survive by collecting garbage to earn his living. Since there was no one to support or guide him, he became completely addicted to intoxication.

One day, while he was intoxicated, he started singing a Bollywood song. Some people standing nearby made fun of him. Smiling, he said, ‘Krish ka gana sunega?’ (Will you listen to Krish’s song?). When people asked him to sing, he began singing in a drunken state, wearing dirty and torn clothes.

The tune he sang was from the song ‘Dil Na Diya, Dil Na Liya,’ but he added his own personal lines like ‘Le beta, har baat pe le beta,’ which were not part of the original song. These lines, spoken in his own style, sounded very appealing when heard from him. Someone recorded the video and uploaded it on the internet. Since then, his video has been searched repeatedly online.

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FROM SOFTWARE DEVELOPER TO SOLDIER.

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Hello friends, at that time I had done a software developer course, at that time I had no intention of joining the force, and after completing the software developer, at that time a huge vacancy came in SSC GD 2013 and in our country, the kind of job that a human being would want, could not develop Yes, so I thought of applying for SSC GD and I applied and as if my joining letter came, at the same time I got selected in a private company of software developer.

But then I felt that when I got a chance to serve the country, I decided to join the soldier by working in a software developer company.

Decision to become a soldier.

When I decided to join the force, I realized that instead of working at a leisure job, it is a hard work job where I have to serve the country day and night.

the world of a software developer.

He is limited to computer, code, project, and deadline, he spends every day sitting in front of the computer screen, finds solutions to problems, and builds better careers, but when the human being decides to become a soldier, his whole life changes.

This journey moves from comfort to discipline and from selfishness to service of the country.

Where the work of a software developer is limited only to the progress of the company, the work of a soldier is purely for the welfare of his countrymen.

From software developer to soldier.

I came to know that not only the army but also the thinking, responsibility and purpose of life will have to change everything.

Even after this, the same enthusiasm started rising in my heart.
It is not easy to wear a chair and wear a uniform.
To live and die for the country is the greatest patriotism.
Only this thought prepared me to become a soldier.
jay hind.

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Passed the Test, But Seniority Denied

Cleared the Exam, Still Seniority Delayed.

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Friends, I had joined CRPF(force) in 2014 in the rank of constable, and since then I have been continuously doing jobs with good ACR, and in 2019, the test for departmental promotion came, and I also appeared for that exam in which first of all the documentation was done, then the physical and its usage was badly written, our exam passed physical and documentation Because of some reason the written exam was cancelled, and since then all the people who took the exam were waiting for the daily written exam. While waiting, the last exam was held in 2023 and the result of our exam came in 2024 and because of the passing of the exam, we all got the bad news Rank was given in 2024 in July and then rank was given according to 2024 only.Now the question arises that when we have passed the log vacancy 2019, is the seniority of 2024 correct, what should we do, is this the right initiative of the government?😐

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