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#हिटलर_गांधी
स्वयंसेवकों का बलिदान..बचा संविधान!
आपातकाल की अंधेरी रात में जब संविधान, अभिव्यक्ति और लोकतंत्र पर पहरा बैठा दिया गया, तब हजारों स्वयंसेवक संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में खड़े थे।
जेल, यातनाएं और प्रतिबंध भी उनके संकल्प को डिगा नहीं सके, उनका त्याग ही लोकतंत्र की


















