कुल्टा कुलच्छिनी
सोई आज,
हम उम्र चचेरे चाचा के साथ
मिटा दी मर्यादा
कटा दी नाक ।
उफ़ ! उम्र का ये बढ़ता बोझ
संभाला न गया
न कर सकी इंतज़ार बाप
की खोज का !!!
पीट-पीट कर माई ने
जब डाला अन्दर हाँथ
सौ रुपए के नोट ने
फाड़ दिए जज़्बात ।
पसीने से कुछ गीला
मुड़ा-तुड़ा वो नोट
ले गया साथ अपने
बेटी का जिस्म नोच ।
कल ही तो रो रही थी मै
इस नोट के लिए
मिल जाये गर तो जाऊँ
किसी डॉक्टर के पास
ले आऊँ दवा जिससे
हो जाये गर्भपात !
चार-चार बच्चे हैं
और अब न चाहिए
रोटी इनकी अटती नहीं
जान मेरी मिटती नहीं
कहते हुए जब खानी चाही थी
गोली मैंने धतूरे की
रोक लिया था मेरा हाँथ
न करो माँ ऐसा,
सब ठीक हो जायेगा ।
न समझी थी दिलासा का
मतलब उस वक्त मै
सोचा था उठा लूंगी कोई
View original post 40 more words