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हरिगोविंद विश्वकर्मा
आज पहली जनवरी थी। दिल्ली में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। भरपूर कपड़े पहनने के बाद भी शैल को काफी ठंड लग रही थी, ठीक कश्मीर की तरह। छात्र जीवन पर बारह साल की मोटी परत चढ़ गई थी, लेकिन उसको लग रहा था कि कल की ही तो बात है। कॉलेज, कैंपस, पढ़ाई, प्रैक्टिकल, चुहलबाज़ी, मौज़–मस्ती बग़ैरह उसके मानस–पटल पर घूमने लगे।
शैल के हाथ...
17 मई 2009 की रात श्रीलंका के उत्तर में नंदीकदल लैगून के आसपास अजीब-सी ख़ामोशी थी। तीन दशकों तक जिस व्यक्ति का नाम पूरे दक्षिण एशिया में आतंक और भय का पर्याय बना रहा, वह अब जंगलों, टूटे रेडियो सेटों और बिखरती हुई वफादारियों के बीच अकेला पड़ चुका था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का मास्टरमाइंड और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे (LTTE)...
भारत के आधुनिक राजनीतिक इतिहास को अगर किसी एक राज्य की सामाजिक–आर्थिक चेतना से जोड़कर समझा जाए, तो वह गुजरात है। यह वह भूमि है जहां धर्म, व्यापार और सत्ता सदियों से एक-दूसरे के समानांतर नहीं, बल्कि एक-दूसरे में घुल-मिलकर चलते रहे हैं। 22 अप्रैल 1498 की दोपहर जब वास्को डी गामा पूर्वी अफ्रीका के मालिंदी तट से भारत की ओर बढ़ता है, तो वह केवल एक समुद्री मार्ग...
हरिगोविंद विश्वकर्मा
सत्ता, शानो-शौकत और विशेषाधिकारों के प्रतीक माने जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जीवन में एक ऐसा वक़्त भी...
हरिगोविंद विश्वकर्मा
शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) भारत के उन चंद नेताओं में से रहे जिनकी न्यूज़वैल्यू अंतिम समय तक जस की तस...