Featured
Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

જુના પુસ્તકો ની pdf બનાવો અને સાચવો.


“દુર્લભ જુના પુસ્તકો ની pdf બનાવો. પ્રોફેશનલ ક્વોલેટી માં બનશે 🙏
અથવા ફાટી ગયેલા પુસ્તકોની ફોટો કોપી કરાવો.

પુસ્તકો ભેજ માં ચોંટી જાય, મિત્રો પાછા ન આપે, ઉધઈ ખાઈ જાય, આપણી હયાતી બાદ તે રદ્દી માં જાય. તે પહેલા pdf બનાવી લેશોજી 🙏🙏
તમારા હસ્તલિખિત પાનાઓ, છાપાઓના કટિંગ ની વ્યવસ્થિત pdf બનાવી લો. સંભાળવાની ઝંઝટ ખતમ.

સ્ટેમ્પ કે ઈત્યાદી દાગા કાઢી અને ચોખ્ખી pdf બનશે 🙏

pdf બનાવવાનો ચાર્જ = એક પાનાના 1 ₹
પુસ્તક લેઝર પ્રિન્ટ ૨ ₹ – બાઈન્ડીંગ ના અલગ

સંપર્ક : 8369123935

harshad30.wordpress.com

દસ હજાર પ્રેરણાત્મક વાર્તાની સાઈટ

https://t.me/v8369123935

જુના પુસ્તકો લે – વેચ નું સૌથી મોટું ગ્રુપ

https://t.me/jokes9999
પતિ પત્ની ના રમુજી પારિવારિક 2000 જોક્સ👫


પુસ્તકપ્રેમી મિત્રોને પોસ્ટ આગળ મોકલજો

Image
Image

“दुर्लभ पुरानी पुस्तकों का pdf बनाएं। व्यावसायिक गुणवत्ता में किया जाएगा 🙏
या फटी हुई किताबों की फोटोकॉपी प्राप्त करें।

किताबें नमी में फंस जाती हैं, दोस्त वापस नहीं देते, दीमक खा जाते हैं, हमारे जीवन के बाद कूड़ेदान में खत्म हो जाते हैं। उससे पहले एक pdf बना लें
अपने हस्तलिखित पृष्ठों का एक संगठित पीडीएफ बनाएं, कटिंग प्रिंट करें। अब कोई परेशानी नहीं है.

स्टाम्प आदि हटा दें और क्लीन पीडीएफ तैयार हो जाएगी

पीडीएफ जेनरेशन चार्ज = ₹1 प्रति पेज
बुक लेजर प्रिंट ₹ 2 – बाइंडिंग अलग से

संपर्क करें: 8369123935

Harshad30.wordpress.com

दस हजार प्रेरक कहानियों का स्थल

https://t.me/v8369123935

पुराने पुस्तक विक्रेताओं का सबसे बड़ा समूह

https://t.me/jokes9999
पति पत्नी अजीब परिवार 2000 चुटकुले👫

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

खलील जिब्रान की एक कहानी है। एक आदमी परदेस गया। वह एक बड़े होटल के सामने खड़ा है। लोग भीतर आ रहे हैं, जा रहे हैं, बैरे लोगों का स्वागत कर रहे हैं—उसनेसमझा कि कोई राज—भोज है। वह भी चला गया। उसका भी स्वागत किया गया। उसको भीबिठाया गया। थाली लगाई गई, उसने भोजन किया।उसने कहा, अदभुत नगर है! इतना अतिथि—सत्कार! फिर बैरा तश्तरी में रख कर उसका बिल ले आया। लेकिन वह समझा कि बड़े अदभुत लोग हैं, लिख कर धन्यवाद भी दे रहे हैं कि आपनेबड़ी कृपा की कि आप आए! वह झुक—झुक कर नमस्कार करने लगा। वह बोला कि बड़ा खुश हूं। मगर वह बैरे को कुछ समझ में न आया कि मामला क्या है, यह झुक किसलिए रहा है,नमस्कार किसलिए कर रहा है! कुछ समझा नहीं, तो मैनेजर को बुला लाया।उस आदमी ने समझा कि हद हो गई, अब खुद मालिक आ रहा है महल का! वह झुक—झुक कर नमस्कार करने लगा और बड़ी प्रशंसा करने लगा, लेकिन एक—दूसरे की बात किसी को समझ में न आए। मैनेजर ने समझा, या तो पागल है या हद दर्जे का धूर्त है। उसको पुलिस के हवाले कर दिया। वह समझा कि अब शायद सम्राट के पास ले जा रहे हैं। वह ले जाया गया अदालत में, मजिस्ट्रेट बैठा था, वह समझा कि सम्राट…।मजिस्ट्रेट ने सारी बात समझने की कोशिश की, लेकिन समझने का वहां कोई उपाय न था। वहां भाषा एक—दूसरे की कोई जानता न था। आखिर उसने दंड दिया कि कुछ भी हो, इसको गधे पर बिठा कर, तख्ती लगा कर इसके गले में कि यह धूर्त है, दगाबाज है और दूसरे लोग सावधान रहें ताकि यह गांव में किसी और को धोखा न दे सके, इसकीफेरी लगवाई जाए। जब उसको गधे पर बिठायाजाने लगा, तब तो उसकी आंख से आंसू बहने लगे आनंद के। उसने कहा, हद हो गई, अब जुलूस निकाला जा रहा है! मैं सीधा—सादा आदमी, मैं कोई नेता वगैरह नहीं हूं मगर मेरा जुलूस निकाला जा रहाहै। मैं तो बिलकुल गरीब आदमी हूं, यह तो नेताओं को शोभा देता है, यह आप क्या कर रहे हैं!मगर कोई उसकी सुने नहीं। जब वह गधे पर बैठ कर गांव में घूमने लगा तो स्वभावत: भीड़ भी पीछे चली। बच्चे चले शोरगुल मचाते। उसकी प्रसन्नता का ठिकाना नहींहै। जीवन में ऐसा कभी अवसर मिला नहीं था। एक ही बात मन में चुभने लगी कि आज कोई अपने देश का होता और देख लेता। जा कर कहूंगा तो कोई मानेगा भी नहीं।वह बडी गौर से देख रहा है भीड़ को। जब बीचचौरस्ते पर उसका जुलूस पहुंचा—शोभा—यात्रा —और काफी भीड़ इकट्ठी हो गई, तो उसे भीड़ में एक आदमी दिखाई पड़ा। वह आदमी उसके देश का था। वह चिल्लाया कि अरे, मेरे भाई, देखो क्या हो रहा है! लेकिन वह दूसरा आदमी तो इस देश की भाषा समझने लगा था, यहां कई साल रह चुका था। ऐसा सिर झुका कर वह भीड़ में से निकल गया कि कोई दूसरा यह न देख ले कि हमारा इनसे संबंध है। लेकिन गधे पर बैठे हुए नेता ने समझा कि हद हो गई, ईर्ष्या की भी एक सीमा होती है!भाषा समझ में न आए तो फिर मनगढ़ंत है सब हिसाब। जब तक समझ में आता है, तब तक अच्छा शब्द, बुरा शब्द; जब समझ में नहीं आता तो सभी शब्द बराबर हैं, कोई अर्थ नहीं है।

ओशो

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक अरब सज्जन दुबई के एक करोड़पतियों वाले रेस्तराँ में बैठकर दोपहर का भोजन कर रहे थे। तभी एक अस्त-व्यस्त, फटेहाल बेघर आदमी अंदर आया और उनके बगल में बैठ गया।
उस आदमी ने कहा,
“मेरे पास एक सोने का लाइटर है। आप इसे खरीदना चाहेंगे, लेकिन पहले ही बता दूँ—इसकी कीमत एक मिलियन डॉलर है।”
अरब हँस पड़ा और बोला,
“क्या तुम पागल हो गए हो बूढ़े आदमी? एक मिलियन डॉलर? यह लाइटर तो एक डॉलर का भी नहीं है!”
बेघर आदमी ने शांति से उस सुनहरे लाइटर को क्लिक किया।
अचानक उसमें से एक जिन्न प्रकट हुआ और बोला,
“हुज़ूर, आपकी क्या इच्छा है?”
पूरा रेस्तराँ चुप हो गया।
वह आदमी जिन्न से बोला,
“मेरे लिए चीनी के साथ एक कप चाय ले आओ।”
जिन्न ने ताली बजाई और—पुफ़!—आग की चमक के साथ एक ट्रे में चाय का गिलास, चीनी और चम्मच प्रकट हो गए।
अरब अपनी आँखें मलने लगा, जो उसने देखा उससे वह हैरान रह गया। बिना देर किए उसने लाइटर पकड़ लिया और उस आदमी के नाम एक मिलियन डॉलर का चेक लिख दिया।
बेघर आदमी बोला,
“इतनी जल्दी नहीं। मुझे कैसे पता कि यह चेक असली है?”
दोनों अरब के बैंक गए और चेक को नकद कराया। जब पैसे की पुष्टि हो गई, तो उन्होंने हाथ मिलाया और अपने-अपने रास्ते चले गए।
अरब खुशी-खुशी अपने महल पहुँचा।
अपने भव्य मेज़ पर बैठकर उसने सोने का लाइटर क्लिक किया।
तुरंत जिन्न फिर से प्रकट हुआ और बोला,
“हुज़ूर, आपकी क्या इच्छा है?”
अरब मुस्कराया और बोला,
“सबसे पहले तो मुझे वह एक मिलियन डॉलर वापस चाहिए जो मैंने तुम्हारे लिए दिए। फिर मुझे एक नई सुपर यॉट चाहिए, अपना निजी लियर जेट, मेरे गैरेज में सबसे नई रोल्स-रॉयस, और उन्हें ईरानी मिसाइलों से बचाने के लिए एक अचूक आयरन-डोम सुरक्षा प्रणाली भी चाहिए।”
जिन्न थोड़ा शर्मिंदा होकर बोला,
“मुझे बहुत अफ़सोस है, हुज़ूर…
मैं केवल चाय या कॉफ़ी ही परोस सकता हूँ।
क्या उसके साथ चीनी भी लेंगे?”
ठीक यही काम अमेरिका ने अरबों के साथ किया है।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

આપણે ત્યાં *અરેન્જ્ડ મેરેજ* માં *છોકરી જોવા જઈએ* એટલે *એક પ્રશ્ન તો બાય ડિફોલ્ટ ફિક્સ જ હોય* કે *છોકરો શું કરે છે* ?😉
*ભુરા માટે છોકરી જોવા ગયું તેનુ ફેમિલી*
*ડ્રોઈંગ રૂમ* માં *ચા-પાણી* અને *નાસ્તો* પતી ગયો,એટલે *છોકરી ના પપ્પા એ ધીમે રહી ને મુદ્દા ની વાત કાઢી* : — તો… *તમારો દીકરો શું કામકાજ કરે છે અત્યારે* ?
*ભુરા ના બાપા* એ…. *ચશ્મા સરખા કર્યા* અને *ગળું ખંખેરી* ને  *ફૂલ કોર્પોરેટ સ્ટાઈલ* માં *પ્રેઝન્ટેશન ચાલુ કર્યું* :- જુઓ,…. *અમારો ભુરો અત્યારે એક એગ્રો-બેઝ્ડ Direct to Consumer સ્ટાર્ટઅપ નો ફાઉન્ડર* અને *મેનેજિંગ ડિરેક્ટર* છે,*અમે ઓર્ગેનિક હેલ્થ* અને *વેલનેસ સેક્ટર* માં *ડીલ કરીએ છીએ*.
*છોકરી ના પપ્પા* તો *સાંભળી* ને જ *અડધા ઈમ્પ્રેસ* થઈ ગયા : “અરે વાહ! *તો પ્રોડક્ટ શું છે તમારી* ?
*બાપા એ પાછો બીજો ફાંકો માર્યો* : — *અમારો મેઈન પોર્ટફોલિયો છે હાઈ-પ્રોટીન રોસ્ટેડ લેગ્યુમ્સ* અને *ટ્રેડિશનલ કેરેમલાઈઝ્ડ સ્વીટ્સ*!
અમે *કાચો માલ સીધો હોલસેલ સપ્લાય ચેન માંથી ઉઠાવીએ* છીએ,પછી *અમારા પોતાના થર્મલ પ્રોસેસિંગ યુનિટ માં એને ડ્રાય-રોસ્ટ કરીએ* છીએ અને *સૌથી મોટી વાત*,
*અમારું પેકેજિંગ ૧૦૦% ઈકો-ફ્રેન્ડલી* અને *બાયોડિગ્રેડેબલ* છે!”
*છોકરીવાળા* તો આ બધું *સાંભળીને જ ચોંકી ગયા* કે *આ તો કોઈ બહુ મોટી મલ્ટીનેશનલ કંપની લાગે છે*! *છોકરી ના કાકા* થી રહેવાયું નહિ એટલે પૂછ્યું: *તો તમારી કંપની ની મેઈન ઓફિસ ક્યાં છે* ? અને *કેટલા કર્મચારીઓ છે* ?
ભૂરા નો બાપો *જરાય ગભરાયા વગર* બોલ્યો : જુઓ…., *અત્યારે મોડર્ન* અને *લીન-સ્ટાર્ટઅપ નો જમાનો* છે એટલે *અમે દુકાનના ભાડા* અને *લાઈટબિલ ના ફાલતુ ખર્ચાઓ માં નથી પડતા*,
અમારું *મોબાઈલ રિટેલ આઉટલેટ* છે,જે રોજના *ટ્રાફિક* અને *પબ્લિક ના ફૂટફોલ* પ્રમાણે *લોકેશન શિફ્ટ* કરે છે,અને બધું *ઓપરેશન* મારો *દીકરો એકલો જ હેન્ડલ કરે* છે, *સોલોપ્રેન્યોર* છે મારો ભુરેશ!”
*છોકરી ના પપ્પા* હવે પૂરેપૂરા *કન્ફ્યુઝ* થયા,એમને થયું કે આ *અંગ્રેજી આપણા ભેજા ની બહાર જાય છે* :  એટલે કહે *મને આ માર્કેટિંગ ની ભાષામાં બહુ ખબર ના પડી*,  જરા *દેશી ભાષા માં સમજાવશો* કે *છોકરો એક્ઝેટલી કરે છે શું* ?
ત્યાં *ખૂણા માં બેઠેલો છોકરા નો ખાસ ભાઈબંધ ધીમે રહીને બોલ્યો* : — અંકલ, …….ભૂરા નાં પપ્પા એમ કહેવા માંગે છે કે *આપણો ભાઈ હાઈવે ના નાકે શિંગ,ચણા અને રેવડી ની લારી ચલાવે છે*!
*કડાઈ માં રેતી નાખી ને ચણા શેકે છે* અને *છાપા ની પડીકી વાળી ને ગ્રાહક ને પકડાવે છે*, એને આ લોકો *બાયોડિગ્રેડેબલ પેકેજિંગ* કહે છે!” 😂
*આ સાંભળી* ને *છોકરી* ના *પપ્પા* ના *હાથ માંથી ચા ની રકાબી પડતા પડતા રહી ગઈ*! 😜
🤑👌😜

Posted in हिन्दू पतन

Real face of Sufism

A news is coming about the grave of Baba Haji Rozbih — believed to be one of the first Sufi saints in Delhi — located inside Sanjay Van, a dense reserved forest in Mehrauli, was razed to the ground by the Delhi Development Authority (DDA). Administration is saying that the demolition was done due to encroachment. 

Who was Haji Rozbih?

Historians and activists raise questions over “encroachment” by an edifice that has existed for 900 years. According to them the grave, which was at the entrance of Qila Lal Kot, finds mention in the definitive “List of Muhammadan and Hindu Monuments, Volume III- Mahrauli Zila” published in 1922 by Maulvi Zafar Hasan, assistant superintendent of the Archaeological Survey of India (ASI). According to the list: “Baba Haji Rozbih is revered as one of the oldest saints of Delhi. He is said to have come during the time of Rai Pithura (PrithviRaj Chauhan, the last Hindu emperor of Delhi) and took up his abode in a cave near the ditch of the fort. The 20th century text also mentions that “many of the Hindus embraced Islam by his advice, and the astrologers regarded this as an ill omen, and told the Raja that the coming of Baba Haji foreboded the advent of the Muhammadan rule into Delhi. It is also alleged by local tradition that a daughter of Rai Pithura also embraced Islam through him, and the other plaster grave which lies in the enclosure is assigned to her.”

We can easily infer that Haji Rozbih was an associate of Khwaja Muinuddin Chisti of Ajmer, the Sufism branch of Chisti Sect. The obsession of Hindus with Ajmer, Chishtiya Silsila and Sufis in general is a product of marketing done by Pseudo-historians like Romila Thaper and co. Popular media (Bollywood movies, music) promotes Sufism as a spiritual, peaceful, mystical brand of Islam.
When Islamic invaders like Gori and Gazni were not able to convert Hindu masses to Islam, the task was assigned to Sufis.

Were Sufia spy to Islamic invaders?

Sufis started imitating and mimicking Hindu sadhus. Muslim fakirs and Sufis started imitating the guru parampara of Hindus and copied Vedantic philosophy, imitating it in songs and popular literature. However, the core of Islamic fundamentalism was never changed. Sufism was a cover for military Islam. Nothing else. This can be traced from their ideology and their practice. They existed to fool Hindus about a spiritual core in Islam and thus convert them. All eminent Sufis were accompanied by Islamic invaders.  Muinuddin Chisti was accompanied to Ajmer and Khwaja Qutubuddin to Delhi by Muḥammad Ghori.  Baba Fareed came to Pakpattan (now in Pakistan) and  Nizamuddin Auliya of  Nizamuddin came to Delhi accompanying a contingent of the Muslim invaders. First they helped in winning over the Hindus Kings and later they help is conversion of Hindus to Islam. We will take few examples from his life which will expose Chisti intentions and real motives.

Chisti believed in conversion of Hindus to Islam

The fawaidu’l –fu’ad says that when Khwaja arrived in Delhi from Lahore seven hundred people (Hindus), besides hamidu’din – din dihlawi, embrace Islam (ref- page 117 vol. 1 a history of Sufism in India –Saiyid Athar Abbas Rizvi).

A critical review of miracles done by Chisti-

Khwaja Ajmer visit is mentioned as full of miracles (exaggerated stories). Since, Khwaja arrived in Ajmer lot of disputes occurred with PrithviRaj, then ruler of Kannauj with capital in Ajmer.

Reaching there he (Chisti) decided to sit under a tree. The camel keepers of PrithviRaj ordered him to leave away from that area as it belonged to the King and restricted area. The truth was that camels keeping area was PrithviRaj army area in which locals were not allowed. A story is imagined that the Khwaja in interfacing the servants of PrithviRaj wished that none of the camels would be able to stand on their legs and so happened. When none of the Camels were able to stand the news reached to the officials of Raj. His officials came to Chisti pleading for guilty. It was than only Khwaja made them well. Any laymen can easily even interpret this whole episode as a fairy tale. Another option is the camels were drugged with some herb which caused paralysis in them provided

Chisti was smart enough for that act.

We will take another example which is far from Truth. The Khwaja and his followers moved to a place near the Anasagar Lake. His servants killed a cow and cooked kebabs for him. Some members of the Khwaja’s party went to Anasagar and the others to Pansela Lake for ablutions. There were one thousand temples on the shores of two lakes. The Brahmans stopped the ablutions and the party complained to the Khwaja. He sent his servant to bring water for his ewer(Pot). As soon as the ewer touched the Pansela Lake, all the lakes, tanks and wells around became dry. Now, Khwaja went to the Anasagar lake temple and asked the name of the idol. He was told it was called Sawi Deva. The Khwaja asked whether the idol had talked to them. On receiving a negative reply he made the idol recite kalma and converted it into a human being, naming it Sa’di. This caused a sensation in the town. PrithviRaj ordered his Prime Minister Jaipal who was also a magician, to avert the evil influence of the Khwaja. Jaipal proceeded to fight the Khwaja with 700 magical dragons, 1500 magical discs and 700 disciples. The Khwaja drew a circle bringing his party within it under his protection and succeeded in killing all the dragons and disciples. Pithaura and Jaipal begged the Khwaja for forgiveness. The Khwaja prayer restored water to the lakes, tanks and wells. A large number of people accepted Islam. Pithaura refused to accept Islam and the Khwaja prophesied he would be handed over to the Islamic army.
(Ref- Ali asghar chisti- jawahir-I faridi , Lahore 1884, pp.155-160 )

The truth was that the area around the two lakes was decorated with many Temples and was considered sacred by the Hindus. Killing of cow again sacred for Hindus was considered as a heinous crime. It is still considered sacred even today. Everyone is aware that a cow eater is strictly forbidden to visit the shrines and temples among Hindus. The same rule was applicable for the visit of Khwaja to Anasagar lake temple. So, its natural for the Hindus to resist Chisti stay near Temples being a meat eater.
Regardiang the fairy tale story of discs and dragons its easy to reach the conclusion that they are exaggerated and hyperbolic statements. They can amuse blind followers and disciples of Chisti. They do not even fulfill the criteria for proper analysis.
One doubt arrives in my mind that if Khawaja was so powerful then why Muhammad Gori was defeated in first war against PrithviRaj? Why didn’t the Khwaja changed his conquest into victory by his miracles? Why did Gori waited till the second war? That also when King Jaichand/Jaipal, the father in law of PrithviRaj helped Mohammad Gori against PrithviRaj. It means that forces of Jaipal lead to victory in war and not the miracles of Chisti. So, we easily reach this conclusion that the stories of miracles of Chisti are myths and only myths. No wise person will believe in these falsified and exaggerated Myths. PrithviRaj died as a hero fighting for his country after taking revenge of his loss. The famous incident is mentioned by Chand Bardai, the accompaniment poet of PrithviRaj.

The case of Nizamuddin-din Auliya

Sheikh Nizamuddin-din Auliya was a disciple of Chisti. He mentions that when Khwaja Muinuddin reached Ajmer, India was ruled by Pithaura rai’s and his capital was Ajmer. Pithaura and his high officials resented the sheik’s presence in their city, but the latter’s eminence and his apparent power to perform miracles, prompted them to refrain from taking action against him. A disciple of the Khwaja’s was in the service of Prithviraj Raj’s. After the disciple began o receive hostile treatment from the Rajas, the Khwaja sent a message to Pithaura in favor of the Muslim. Pithaura refused to accept the recommendation, thus indicating his resentment of, the khwaja’s alleged claims to understand the secrets of the unseen. When Khwaja Muinuddin heard of this reply he prophesied: “We have seized Pithaura alive and handed him over to the army of Islam.” about the same time Sultan Muhammad Gori arrived from Ghazna, attacked the forces of Pithaura and defeated them. Pithaura was taken alive and thus the khwaja’s prophesy was fulfilled. (Ref- Amir khwurd, siyaru’l – auliya, delhi,1885,pp.45-47)

Kashmir and Sufi Hamdani

Mir Sayyid Ali Hamadani (1314–1384) was a Persian Sūfī of the Kubrawiya order, a poet and a prominent Muslim scholar. He was born in Hamadan, and was buried in Khatlan Tajikistan. Hamdani came to India and settled in Kashmir. His Dargah in Srinagar, Kashmir is located in Babdem- Kahan Kah Road, Shamswari. Many Hindus visits his Dargah seeking Blessings of Hamadani. But very few knows the reality about him.

Mir Saiyid Ali Hamadani (founder of Kubrawiyya Sufi order of Kashmir) emphasized a covenant to sultan of Kashmir on his relation with Hindus. Covenant is as follows:

1.      They (the hindus) will not bid new idol temples.
2.      They will not rebuild any existing temple which may have fallen into disrepair.
3.      Muslim travelers will not be prevented from staying in temples.
4.      Muslim travelers will be provided hospitality by Zimmis in their own houses for three days.
5.      Zimmis will neither act as spies nor give spies shelter in their houses.
6.      If any relation of a Zimmi is inclined towards Islam, he should not be prevented from doing so.
7.      Zimmis will respect Muslims.
8.      Zimmis will courteously receive a Muslim wishing to attend their meetings.
9.      Zimmis will not dress like Muslims.
10.  They will not take Muslim names.
11.  They will not ride horses with saddle and bridle.
12.  They will not possess swords, bows or arrows.
13.  They will not wear signet rings.
14.  They will not openly sell or drink intoxicating liquor.
15.  They will not abandon their traditional dress, which is a sign of their ignorance, in order that they may be distinguished from Muslims.
16.  They will not openly practice their traditional customs amongst Muslims.
17.  They will not build their houses in the neighborhood of Muslims.
18.  They will not carry or bury their dead near Muslim graveyards.
19.  They will not mourn their dead loudly.
20.  They will not buy Muslim slaves.

Hamadani considered all Hindus as Zimmis.S.A.A. Rizvi in History of Sufism in India writes Hamadani was talking like a Alim instead of Sufi in this Covenant. The Dargah of Hamdani was built by destroying Kali Temple.

Shah Walullah invited Abdali to establish Islamic Rule over India

Shah Waliullah’s letters to Islamic rulers and nobles show that he was very keen in rejuvenating Islamic supremacy in Delhi, which had started to loosen it’s grip over the sub-continent immediately after Aurangzeb’s death.  In his letter to Abdali mentioned in S.A.A. Rizvi’s book  he writes –

“After prayers and wishes to God (Allah) I am writing these few words, may He carry them to the blessed ears (of Ahmadshah Abdali). Existence of an Islamic Emperor is a favour (of Allah). It should be understood that Hindustan (region north of Narmada river) is a vast country. Earlier Emperors have toiled very hard for a long time and through multiple attempts have managed to win over this country.”….In short, apart from key areas of Delhi and Deccan, the Marathas have overall control. It is not difficult to defeat the Marathas if the Ghazis of Islam make a strong resolve.

Thus, it wasSufi Walullah letter which invited Abdali to attack India and thus he was responsible for mass killing, abduction , slavery and destruction of Hindus.

Ahmad Sirhindi urged Muslims to help him in annihilation of Sikhs from northern India.

11 January 1827 he (Saiyid Ahmad Shahid) officiated at a ceremony of bay’a in which several thousand theologians, Sufis, leading citizens and common people in the northwest frontier pledged him their allegiance, after which they recited the khutba in his name. At the time Saiyid protested that as an Imam he was not commissioned to deprive the various sultans between Kabul and Bukhara of their states. They could continue to flourish in peace, he said, and would assert only his leadership in the question of bid’a (sinful innovations). However they were urged to offer him their military assistance in a jihad against the Sikhs. He was killed in war against Sikhs in Balakot ( now in Pakistan) and his grave is still present there.

Today, Sufism is celebrated as an ethos of diversity as Hindus also revere the saint. I am not against the social cohesion but understanding the history is a must. We must not ignore the context of the arrival of Sufism in India and how it was a channel of conversion by force and persuasion. Conversion, be coercive or sublime, attacks the core value of diversity by trying to thrust people to one singular identity of faith – Islamism.

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

क्या आप जानते है की वैतरणी के वारे मे नहि तो आईए जानते है। ## 🌊हमारी कलम से। वैतरणी नदी का रहस्य: यमलोक की भयावह यात्रा की कथा 🌊

प्राचीन धर्मग्रंथों जैसे गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का अत्यंत रहस्यमय और गंभीर वर्णन मिलता है। यह यात्रा केवल शरीर के अंत से समाप्त नहीं होती, बल्कि आत्मा को अपने कर्मों के अनुसार अनेक लोकों से गुजरना पड़ता है।

इन्हीं लोकों के मार्ग में एक अत्यंत भयानक और रहस्यमयी नदी आती है — **वैतरणी नदी**।

इसे यमलोक का द्वार भी कहा जाता है, क्योंकि इसे पार किए बिना आत्मा आगे नहीं बढ़ सकती।



# 🕉️ मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा

कहा जाता है कि जब मनुष्य की मृत्यु होती है, तब यमराज के दूत — जिन्हें **यमदूत** कहा जाता है — आत्मा को उसके शरीर से अलग कर देते हैं।

वे उसे कर्मों के अनुसार यमलोक की ओर ले जाते हैं, जहां न्याय के देवता

यमराज आत्मा के अच्छे और बुरे कर्मों का निर्णय करते हैं।

इस यात्रा में आत्मा को कई भयानक मार्गों से गुजरना पड़ता है —

अंधकार से भरे जंगल, जलते हुए पत्थर, कांटों से भरे रास्ते, और अंततः पहुंचती है उस भयानक नदी के तट पर — **वैतरणी**।



# 🔥 वैतरणी नदी का भयानक स्वरूप

वैतरणी नदी कोई साधारण नदी नहीं है।

यह पापों का दर्पण है — जहां आत्मा को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।

गरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि:

* इस नदी में स्वच्छ जल नहीं होता।

* इसमें **खौलता हुआ रक्त, पीप, गंदा कीचड़ और विषैले पदार्थ** बहते रहते हैं।

* इसकी लहरें आग की तरह तपती रहती हैं।

* नदी में भयानक जीव रहते हैं — विशाल साँप, बिच्छू, मगरमच्छ और मांसभक्षी पक्षी।

जब पापी आत्माएं इस नदी में गिरती हैं, तो ये जीव उन्हें काटते और नोचते रहते हैं।

नदी का पानी इतना गर्म होता है कि आत्मा को ऐसा लगता है मानो वह जलती हुई आग में गिर गई हो।



# ⚖️ किन लोगों को वैतरणी में गिरना पड़ता है

शास्त्र बताते हैं कि जिन लोगों ने जीवन में धर्म का पालन नहीं किया, उन्हें इस नदी की यातना सहनी पड़ती है।

ऐसे लोग हैं:

* जो माता-पिता और गुरु का अपमान करते हैं

* जो झूठ, छल-कपट और विश्वासघात करते हैं

* जो गरीब और असहाय लोगों को कष्ट देते हैं

* जो गौ का अपमान या हत्या करते हैं

* जो लोभ के कारण दान-पुण्य नहीं करते

ऐसी आत्माओं को यमदूत पकड़कर सीधे वैतरणी नदी में धकेल देते हैं।



# 🐂 गौदान: वैतरणी पार करने का दिव्य उपाय

लेकिन शास्त्र केवल भय नहीं बताते, बल्कि **मुक्ति का मार्ग भी बताते हैं**।

कहा गया है कि जिसने जीवन में श्रद्धा से **गौदान** किया हो, उसके लिए वैतरणी पार करना आसान हो जाता है।

जब ऐसी आत्मा नदी के किनारे पहुंचती है, तब वही गाय वहां प्रकट होती है।

आत्मा उस गाय की **पूंछ पकड़कर सुरक्षित नदी पार कर लेती है**।

इसलिए हिंदू धर्म में गौदान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।



# 🙏 वैतरणी दान का विशेष महत्व

कई स्थानों पर **वैतरणी दान** की परंपरा भी है।

यह दान विशेष रूप से मृत्यु के समय या श्राद्ध पक्ष में किया जाता है।

इसमें मुख्यतः ये वस्तुएं दान की जाती हैं:

* काली गाय (या उसका प्रतीक)

* तिल

* लोहा

* कंबल

* जल पात्र

* अन्न

यह दान आत्मा को नरक के कष्टों से बचाने वाला माना जाता है।



# 🌼 एक प्राचीन कथा

कहते हैं कि एक नगर में **धर्मदास** नाम का व्यापारी रहता था।

वह बहुत धनवान था, लेकिन जीवनभर उसने किसी की सहायता नहीं की।

न दान किया, न गौसेवा की, और न ही धर्म के मार्ग पर चला।

जब उसकी मृत्यु हुई, तब यमदूत उसे पकड़कर यमलोक की ओर ले गए।

मार्ग में जब वह वैतरणी नदी के तट पर पहुंचा, तो उसने देखा कि नदी में भयानक जीव तैर रहे हैं और पापी आत्माएं चीख रही हैं।

यमदूतों ने उसे नदी में धकेल दिया।

वह भय से कांप उठा और चिल्लाने लगा —

“मुझे बचाओ!”

तभी उसे अपने जीवन की याद आई —

कभी उसने किसी भूखे को भोजन नहीं दिया था,

कभी किसी गरीब की मदद नहीं की थी।

अब उसके पास कोई सहारा नहीं था।

तभी उसने देखा कि कुछ आत्माएं गाय की पूंछ पकड़कर आसानी से नदी पार कर रही थीं।

उसे तब समझ आया —

**पुण्य ही मृत्यु के बाद सच्चा सहारा होता है।**



# 🌟 वैतरणी नदी का आध्यात्मिक संदेश

वैतरणी नदी केवल भय की कहानी नहीं है।

यह मनुष्य को चेतावनी और प्रेरणा देने वाली शिक्षा है।

यह हमें बताती है:

✔ सत्य और धर्म का पालन करो

✔ माता-पिता और गुरु का सम्मान करो

✔ दान और सेवा करो

✔ गौ और जीवों के प्रति करुणा रखो

क्योंकि मृत्यु के बाद **धन, पद और प्रतिष्ठा साथ नहीं जाते**।

साथ जाते हैं तो केवल **आपके कर्म**।



✨ **अंतिम संदेश**

> “जीवन एक अवसर है — पुण्य कमाने का।

> जो आज धर्म के मार्ग पर चलता है,

> वही कल वैतरणी के उस पार शांति पाता है।”

🙏

**।। जय श्री हरि ।।**

#sanatandharma #sanatani #sanatanihindu #bhakti #post #spirituality #moral #story #storytelling #storytime #stories #storefront #storyteller

🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कार्तिक महीने में सब औरते तुलसी माता को सींचने जाती थी । सब तो सींच कर आती परन्तु एक बूढ़ी माई आती और कहती कि हे तुलसी माता ! सत की दाता , मैं बिलड़ा सींचूं तेरा , तू कर निस्तारा मेरा , तुलसी माता अड़ुआ दे लडुआ दे ,पीताम्बर की धोती दे , मीठा मीठा गास दे , बैकुंठ का वास दे , चटके की चाल दे , पटके की मौत दे , चन्दन की काठ दे , झालर की झनकार दे , साई का राज दे , दाल भात का जीमन दे , ग्यारस की मौत दे , श्रीकृष्ण का कांधा दे।
यह बात सुनकर तुलसी माता सूखने लगी तो भगवान ने पूछा हे तुलसी ! तुम क्यों सूख रही हो ? तुम्हारे पास इतनी औरतें रोज आती है , तुम्हे मीठा भोग लगाती है , गीत गाती है। तुलसी माता ने कहा एक बूढ़ी माई रोज आती है और इस तरह की बात कह जाती है। मैं सब बात तो पूरी कर दूंगी पर कृष्ण का कन्धा कहाँ से दूंगी। भगवान बोले – वह मरेगी तो कन्धा मैं दे आऊंगा।
कुछ समय पश्चात बूढ़ी माई का देहांत हो गया। सारे गाँव वाले एकत्रित हो गए और बूढ़ी माई को ले जाने लगे तो वह इतनी भारी हो गयी की किसी से भी नहीं उठी सबने कहा इतना पूजा पाठ करती थी , पाप नष्ट होने की माला फेरती थी , फिर भी इतनी भारी कैसे हो गयी।
बूढ़े ब्राह्मण के रूप में भगवान वहाँ आये और पूछा ये भीड़ कैसी हैं ? तब वहाँ खड़े लोग बोले ये बूढ़ी माई मर गयी है। पापिन थी इसीलिए भारी हो गयी है किसी से भी उठ नहीं रही है तो भगवान ने कहा मुझे इसके कान में एक बात कहने दो शायद उठ जाये।
भगवान ने बूढ़ी माई के पास जाकर कान में कहा कि बूढ़ी माई मन की निकाल ले , अड़ुआ ले गडुआ ले , पीताम्बर की धोती ले , मीठा मीठा ग्रास ले , बैकुण्ठ का वास ले , चटक की चाल ले, चन्दन की काठ ले , झालर की झंकार , दाल भात का जीमन ले और कृष्ण का कांधा ले।
इतना सुनना था की बुढ़िया हल्की हो गयी भगवान अपने कंधे पर ले गए और बुढ़िया को मुक्ति मिल गयी।
हे तुलसी माता ! जैसी मुक्ति बूढ़ी माई की करी वैसी ही हमारी भी करना और जैसे उसको कन्धा मिला वैसे सभी को देना।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

આપણે ત્યાં અરેન્જ્ડ મેરેજમાં છોકરી જોવા જઈએ એટલે એક પ્રશ્ન તો બાય ડિફોલ્ટ ફિક્સ જ હોય કે “છોકરો શું કરે છે?”😉
.
ભુરા માટે છોકરી જોવા ગયુ તેનુ ફેમિલી. ડ્રોઈંગ રૂમમાં ચા-પાણી અને નાસ્તો પતી ગયો, એટલે છોકરીના પપ્પાએ ધીમે રહીને મુદ્દાની વાત કાઢી: “તો તમારો દીકરો શું કામકાજ કરે છે અત્યારે?”
.
ભુરાના બાપાએ ચશ્મા સરખા કર્યા અને ગળું ખંખેરીને ફૂલ કોર્પોરેટ સ્ટાઈલમાં પ્રેઝન્ટેશન ચાલુ કર્યું:- “જુઓ, અમારો ભુરો અત્યારે એક એગ્રો-બેઝ્ડ Direct to Consumer સ્ટાર્ટઅપનો ફાઉન્ડર અને મેનેજિંગ ડિરેક્ટર છે. અમે ઓર્ગેનિક હેલ્થ અને વેલનેસ સેક્ટરમાં ડીલ કરીએ છીએ.”
.
છોકરીના પપ્પા તો સાંભળીને જ અડધા ઈમ્પ્રેસ થઈ ગયા: “અરે વાહ! તો પ્રોડક્ટ શું છે તમારી?”
.
બાપાએ પાછો બીજો ફાંકો માર્યો: “અમારો મેઈન પોર્ટફોલિયો છે હાઈ-પ્રોટીન રોસ્ટેડ લેગ્યુમ્સ અને ટ્રેડિશનલ કેરેમલાઈઝ્ડ સ્વીટ્સ! અમે કાચો માલ સીધો હોલસેલ સપ્લાય ચેનમાંથી ઉઠાવીએ છીએ, પછી અમારા પોતાના થર્મલ પ્રોસેસિંગ યુનિટમાં એને ડ્રાય-રોસ્ટ કરીએ છીએ. અને સૌથી મોટી વાત, અમારું પેકેજિંગ ૧૦૦% ઈકો-ફ્રેન્ડલી અને બાયોડિગ્રેડેબલ છે!”
.
છોકરીવાળા તો આ બધું સાંભળીને જ ચોંકી ગયા કે આ તો કોઈ બહુ મોટી મલ્ટીનેશનલ કંપની લાગે છે! છોકરીના કાકાથી રહેવાયું નહિ એટલે પૂછ્યું: “તો તમારી કંપનીની મેઈન ઓફિસ ક્યાં છે? અને કેટલા કર્મચારીઓ છે?”
.
બાપો જરાય ગભરાયા વગર બોલ્યો: “જુઓ, અત્યારે મોડર્ન અને લીન-સ્ટાર્ટઅપ નો જમાનો છે એટલે અમે દુકાનના ભાડા અને લાઈટબિલના ફાલતુ ખર્ચાઓમાં નથી પડતા. અમારું ‘મોબાઈલ રિટેલ આઉટલેટ’ છે, જે રોજના ટ્રાફિક અને પબ્લિકના ફૂટફોલ પ્રમાણે લોકેશન શિફ્ટ કરે છે. અને બધું ઓપરેશન મારો દીકરો એકલો જ હેન્ડલ કરે છે, સોલોપ્રેન્યોર છે મારો ભુરેશ!”
.
છોકરીના પપ્પા હવે પૂરેપૂરા કન્ફ્યુઝ થયા, એમને થયું કે આ અંગ્રેજી આપણા ભેજાની બહાર જાય છે: “મને આ માર્કેટિંગની ભાષામાં બહુ ખબર ના પડી. જરા દેશી ભાષામાં સમજાવશો કે છોકરો એક્ઝેટલી કરે છે શું?”
.
ત્યાં ખૂણામાં બેઠેલો છોકરાનો ખાસ ભાઈબંધ ધીમે રહીને બોલ્યો: “અંકલ, આ કાકા એમ કહેવા માંગે છે કે આપણો ભાઈ હાઈવેના નાકે શિંગ, ચણા અને રેવડીની લારી ચલાવે છે! કડાઈમાં રેતી નાખીને ચણા શેકે છે અને છાપાની પડીકી વાળીને ગ્રાહકને પકડાવે છે, એને આ લોકો બાયોડિગ્રેડેબલ પેકેજિંગ કહે છે!” 😂
.
આ સાંભળીને છોકરીના પપ્પાના હાથમાંથી ચાની રકાબી પડતા પડતા રહી ગઈ! 😜
.
તો ભાઈઓ, માર્કેટિંગમાં શબ્દોની માયાજાળ બહુ અઘરી વસ્તુ છે, જો તમારું પ્રેઝન્ટેશન જોરદાર હોય તો શિંગ-ચણાની લારી પણ કોર્પોરેટ સ્ટાર્ટઅપ બની શકે છે!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अल्बर्ट आइंस्टीन बड़ा गणितज्ञ था, लेकिन उसने विवाह जिससे किया, फ्रा आइंस्टीन से, वह एक कवि स्त्री थी। यह बड़ा कठिन जोड़ है। ऐसे तो पति—पत्नी के सभी जोड़ बड़े कठिन होते हैं! लेकिन यह और भी कठिन जोड़ था। दुर्घटना से ही कभी ऐसा होता है कि पति—पत्नी का जोड़ कठिन न हो, सामान्यतया तो कठिन होता ही है। लेकिन यह आइंस्टीन का जोड़ तो और मुश्किल था। आइंस्टीन तो सिर्फ गणित की भाषा ही समझता था। और कविता और गणित की भाषा में जितना फासला हो सकता है, उतना किस भाषा में होगा?

फ्रा ने, उसकी पत्नी ने, शादी के बाद जो पहला काम चाहा, वह यह कि आइंस्टीन को कुछ अपनी कविता सुनाए। उसने एक गीत लिखा था, उसने उसे सुनाया। आइंस्टीन आंख बंद करके बैठ गया। फ्रा ने समझा कि वह बहुत चिंतन कर रहा है उसके गीत पर। आखिर उसने आंख खोली और उसने कहा कि यह पागलपन है, दुबारा मुझे मत इस तरह की बात बताना। उसकी पत्नी ने कहा, पागलपन! आइंस्टीन ने कहा, मैंने बहुत सोचा..।

क्योंकि फ्रा ने एक प्रेम का गीत लिखा था, जिसमें उसने अपने प्रेमी को, अपने प्रेमी या प्रेयसी के भाव को, चेहरे को, चांद से तुलना की थी। आइंस्टीन ने कहा, मैंने बहुत सोचा। चांद और आदमी के चेहरे में कोई भी संबंध नहीं है। कहां चांद, पागल! अगर आदमी के ऊपर रख दो, तो आदमी का पता ही न चले, अगर उसका सिर बना दो तो। और चांद के सौंदर्य का मैं सोचता हूं तो वहां तो सिवाय खाई—खड्ड के और कुछ है नहीं। आदमी के चेहरे से चांद का क्या संबंध है?

फ्रा ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि मैंने समझ लिया कि हम दो अलग जातियों के प्राणी हैं और यह बातचीत आगे चलानी उचित नहीं है। यह बंद ही कर देनी चाहिए। यह विषय ही उठाना ठीक नहीं है। क्योंकि अगर सिद्ध करने जाओ, तो आदमी के चेहरे और चांद में कोई संबंध नहीं सिद्ध हो सकता। लेकिन फिर भी कभी कोई चेहरा चांद की याद दिलाता है। और कभी चांद किसी चेहरे की भी याद दिलाता है। लेकिन वह कोई और ही बात है सौंदर्य की। उसका गणित से कोई संबंध नहीं है, माप से कोई संबंध नहीं है।

ईश्वर को जब भी हम मापने चलते हैं, तभी हम आकार देते हैं। और जब भी हम पूछते हैं, कहां है ईश्वर? कैसा है ईश्वर? क्या है उसका रूप? क्या है उसका रंग? क्या है उसकी आकृति? तब हम गलत सवाल पूछ रहे हैं। सब आकृतियां जिसकी हैं, और सब रूप जिसके हैं, वही है ईश्वर।

इसे हम ऐसा समझें कि आप सागर के किनारे खड़े हो जाएं। आपने सागर कभी देखा न होगा। आप कहेंगे, बिलकुल कैसी पागलपन की आप बात कर रहे हैं! हम सब सागर के किनारे ही रहने वाले लोग, सागर हम रोज देखते हैं। लेकिन मैं आपसे कहता हूं, सागर आपने कभी नहीं देखा। सिर्फ आपने सागर के ऊपर की उठती हुई लहरें देखी हैं। लहरें सागर नहीं हैं। लहरों में सागर है, लहरें सागर नहीं हैं। क्योंकि सागर बिना लहरों के भी हो सकता है, लहरें बिना सागर के नहीं हो सकतीं।

लेकिन आप लहरों को देखकर लौट आते हैं और सोचते हैं, सागर को देखकर लौट आए। हर लहर में सागर है, सब लहरों में सागर है। लेकिन सागर लहरों के पार भी है, लहरों से गहरा भी है। लहरें सागर के ऊपर ही डोलती रहती हैं। सागर बहुत बड़ा है। हमने लहरें ही देखी हैं। इसलिए कोई यह भी पूछ सकता है कि किस लहर को आप सागर कहते हैं?

हमने आदमी देखे हैं। पौधे देखे हैं। पशु देखे हैं। पक्षी देखे हैं। हम पूछते हैं कि किसको आप भगवान कहते हैं? कौन है ईश्वर? ये सब लहरें हैं उसी एक सागर की। इन सबके भीतर जो है, इन सबके नीचे जो है, जिस पर ये लहरें उठती हैं और जिसमें ये लहरें विलीन हो जाती हैं, वह सागर परमात्मा है। वह हमने नहीं देखा, हम लहरें ही देख पाते हैं।

मैं आपको देखता हूं लेकिन उसको नहीं देखता, जो आपके पहले भी था, आपके भीतर भी है अभी; और कल आप गिर जाएंगे, तब भी होगा। आप तो सिर्फ एक लहर हैं, जो उठी जन्म के दिन और गिरी मृत्यु के दिन, और कभी जवान थी और आकाश को छूने का सपना देखा। आप सिर्फ एक लहर हैं। लेकिन जब आप नहीं थे, आपकी आकृति नहीं थी, तब भी आप सागर में थे। और कल आपकी आकृति गिरकर लीन हो जाएगी, तब भी आप सागर में होंगे। सागर सदा होगा।

ओशो
गीता दर्शन

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मैं वृद्धों के एक मंडल में बैठा था। वे सभी अवकाश-प्राप्त व्यक्ति हैं और लोक-परलोक की एक से एक व्यर्थ चर्चा में संलग्न रहते हैं। वैसे वे कहते इसे धर्म-चर्चा ही हैं, और यह ठीक भी है। क्योंकि जिन्हें धर्मशास्त्र कहा जाता है, उनमें भी ऐसे ही ऊहापोह की भरमार है। कई बार विचार आता है कि इन तथाकथित धर्मशास्त्रों को कहीं अवकाश-प्राप्त वृद्धों ने ही तो नहीं सिरजा है!

धर्म यदि कुछ है तो स्वयं जीवन है, व्यर्थ के ऊहापोह से उसका क्या संबंध?

लेकिन, शास्त्र तो बस शब्दों से भरे हैं। और धार्मिक कहे जाने वाले मस्तिष्क आकाशों की स्वप्न-यात्रा करते रहते हैं। शास्त्र और सिद्धांत उनके चित्त में धर्म के प्रवेश के लिए द्वार ही नहीं देते हैं।

धार्मिक चित्त क्या है?

मैं तो सब भांति शब्दों, सिद्धांतों और विचारों से शून्य चेतना को ही धार्मिक कहता हूं।

धार्मिक चित्त, काल्पनिक चित्त नहीं है। अपितु, उससे ज्यादा यथार्थवादी और सत्य की ठोस भूमि पर खडी हुई और कोई चेतना ही नहीं होती है।

मैं वृद्धों के विवाद को बडे आनंद से सुनता था कि तभी एक संन्यासी का भी आगमन हो गया था। वे इस पर विचार करते थे कि कितने-कितने जन्मों की कितनी-कितनी तपश्चर्या से मुक्ति उपलब्ध होती है। संन्यासी भी इस विवाद में कूद पडे थे। निश्चय ही वे ज्यादा अधिकारी थे और इसलिए उनकी आवाज भी सबसे ज्यादा तेज थी। शास्त्रों की दुहाइयां दी जा रही थीं और कोई भी किसी की सुनने या मानने को तैयार नहीं था।
एक वृद्ध का कहना था कि सैकडों जन्म के कठोर तप से मुक्ति प्राप्त होती है। दूसरे का विचार था कि मुक्ति के लिए तप की या सैकडों जन्मों की कोई बात ही नहीं। वह तो प्रभु-कृपा से कभी भी मिल सकती है। तीसरे का कहना था कि चूंकि अमुक्ति भ्रम है, इसलिए तप से उसे नष्ट करने का सवाल ही नहीं है। वह तो ज्ञान की एक झलक में उसी भांति तिरोहित हो जाती है जैसे रज्जु में भासता सर्प विलीन हो जाता है।

फिर किसी ने मुझ से पूछाः ‘‘आप का क्या ख्याल है? ’’ मैं क्या कहता? इसीलिए तो एक कोने में चुपचाप दबा बैठा था कि कहीं किसी की दृष्टि मुझ पर भी न पड जाए। शास्त्रों का मुझे कोई ज्ञान नहीं है। सौभाग्य से उस दिशा में जाने की भूल ही मैंने नहीं की। अतः पूछने पर भी मैं चुप ही रह गया।

लेकिन थोडी देर बाद फिर किसी ने पूछाः ‘‘आप कुछ क्यों नहीं बोलते हैं? ’’ मैं बोलता भी तो क्या बोलता? जहां इतने बोलने वाले हों, वहां मैं अकेला ही तो सुननेवाला था। मैं फिर भी चुप ही रह गया। शायद मेरी यह चुप्पी ही बोलने लगी और उन सबका ध्यान अंततः मेरी ही ओर आ गया। शायद वे सब थक गए थे और विश्राम लेना चाहते थे।

मैं जब फंस ही गया था तो मुझे कुछ न कुछ तो कहना ही था।

मैंने एक कहानी कहीः एक गांव में ऐसी परंपरा थी कि जब भी किसी युवक का विवाह होता तो उसे या वरपक्ष को विवाह में कम से कम पांच हजार रुपये खर्च करने पडते थे। वह गांव बडा धनी था और इससे कम में वहां विवाह नहीं होते थे। उस गांव के शास्त्रों में भी ऐसा ही लिखा था। उन शास्त्रों को तो कभी किसी ने नहीं पढा था, लेकिन गांव के पुरोहित का ऐसा कहना था। पुरोहित से विवाद कौन करता? उसे तो अतीत की किसी मातृभाषा में लिखे सारे शास्त्र कंठस्थ थे। शास्त्र तो सदा से ही स्वतः प्रमाण रहे हैं। उनमें जो है, वही सत्य है। सत्य का और लक्षण ही क्या है? शास्त्र में होना ही तो सत्य का लक्षण है!

लेकिन एक बार ऐसा हुआ कि एक युवक ने केवल पांच सौ रुपयों में ही विवाह कर डाला और उसकी बहू भी आ गई। निश्चय ही वह युवक कुछ विद्रोही रहा होगा, अन्यथा ऐसा कैसे कर सकता था। गांव के लोगों ने उससे पूछाः ‘‘तूने कितने रुपये खर्च किए? ’’ वह बोलाः ‘‘पांच सौ।’’ फिर तो गांव की पंचायत बैठी और पंचों ने उससे कहाः ‘‘गलत है। बिना पांच हजार खर्च किए तो विवाह हो ही नहीं सकता।’’ वह युवक हंसा और बोलाः ‘‘पांच सौ से विवाह हो सकता है या नहीं, यह व्यर्थ बहस तुम करो। मुझको तो बहू मिल गई है और उसका सुख प्राप्त है।’’

यह कह कर वह युवक अपने घर चल दिया था।

मैं भी उठा और उन वृद्धों से बोलाः ‘‘पंचो, नमस्कार। आप बहस जारी रखें, मैं भी अब चलता हूं।’’

– मिट्टी के दीये (कथा-08)

ओशो

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ચીનના એક સમ્રાટનું મૂર્તિઓનું સંગ્રહસ્થાન બદલવાનું હતું. સમ્રાટ અત્યંત કલાપ્રેમી હતો. મૂર્તિઓને ખસેડતા કોઈ નુકસાન થાય તો મૃત્યુદંડની સજા નક્કી કરી.

મજૂરી દસગણી આપવાના હોવાથી, આવી ભયંકર સજા હોવા છતાં મજૂરોની લાઈન લાગી. ખસેડવા જતા એક મજૂરથી એક મૂર્તિનો હાથ ભાંગી ગયો. તાત્કાલિક એને દેહાંતદંડની સજા થઈ.

એક દિવસ બાદ બીજા મજૂરથી એક મૂર્તિની ગરદન પર ટોચો પડ્યો. એને પણ એ જ સજા થઈ. બે દિવસ બાદ ત્રીજા મજૂરથી એક મૂર્તિના પગની આંગળી ખંડિત થઈ. એને પણ મોતને ઘાટ ઉતારી દેવાયો. ચોથા દિવસે એક પણ મજૂર કામ પર ન આવ્યો. રાજાએ વીસગણી મજૂરી આપવાની જાહેરાત કરી. પાંચમાં દિવસે પણ કોઈ મજૂર કામે ન આવ્યો.
પ્રધાને સમ્રાટને કહ્યું, ‘મૃત્યુને બદલે કોઈ હળવી સજા કરવામાં આવે તો મજૂરો આવે.’ પણ અભિમાની રાજા ટસના મસ ન થયા. સજા એ જ રાખી.

વધુ થોડા દિવસો વીતી ગયા પણ કોઈ ન આવ્યું. રાજાએ કહ્યું કે ‘મજૂરી પચાસગણી કરી દો.’

જેવી જાહેરાત થઇ કે તરત એક માણસ મજૂરી પર આવ્યો. રાજાએ કહ્યું કે મેં નહોતું કહ્યું, ‘વધુ પૈસા આપીશું એટલે કોઈ પણ માણસ આવશે.’

પેલા માણસે કહ્યું, ‘હું કામ કરીશ પણ મારી એક શરત છે, હું કામ કરતો હોઉં ત્યારે રાજ્યના કોઈનું સુપરવિઝન ન હોવું જોઈએ’. રાજાએ શરત કબૂલ રાખી. એ માણસે સંગ્રહાલયના બારણાં બંધ કર્યા અને એક મોટો હથોડો લઈ બધી મૂર્તિઓનો કચ્ચરઘાણ બોલાવી નાખ્યો. સમ્રાટને આ વાતની જાણ થતા, ભયંકર ગુસ્સા સાથે દોડી આવ્યા.
મજૂરે રાજાને કહ્યું, ‘મને ઝડપથી મૃત્યુની સજા આપો’.
રાજાએ કહ્યું, ‘તારા ચહેરા પર ડરને બદલે આનંદ કેમ છવાયેલો છે ?’
ત્યારે મજૂરે કહ્યું, ‘મેં સો માણસોના જીવ બચાવ્યા છે. વળી, જે રાજ્યમાં માણસ કરતાં મૂર્તિની કિંમત વધુ હોય ત્યાં જીવવાનો કોઈ અર્થ નથી.’

અહંની વાત આવે એટલે આપણે રાવણ પર તૂટી પડીએ છીએ, એને અભિમાન સાથે જોડી દઇને આપણે આપણા અહંને પોષીએ છીએ. અભિમાની માણસ જે ઝડપથી ઊંચે જાય છે એ જ ઝડપથી નીચે આવે છે. અહંકારી માણસને દુશ્મનની જરૂર નથી.

અહંકાર જ એનો દુશ્મન બની જાય છે.સ્વામી વિવેકાનંદે કહ્યું છે, ‘તમારામાં જો અહંકાર નથી તો કોઈ પુસ્તક વાંચ્યા વિના પણ તમે મોક્ષ મેળવી શકો છો.
#facebookvireal #everyonefollowers #love #God #like #share