आँधियों को तू ज़रा इशारा तो कर
तू ज़र्रा है ज़मीन का, आसमान से शिकायत न करकरना है कुछ अगर तो आँधियों को इक ईशारा तो करतिनका है तू फिर तो क्या हुआतू भी कुछ देर आसमान को चूमेगाशायद समझ आ जाये कुछ उन ताज पोशों को भीजो बैठ गए है जाके आसमान में ख़ुदा बन कर फ़ितरत तेरी तू बदल कर […]
