
ख्वाब भी है खयाल भी है !
कोई दिल में सवाल भी है !
क्यों यह होता है !
माजरा क्यों कर !
क्यों उरूज के बाद !
ज़वाल भी है !
छीन लेते हैं लेते हैं खुशी क्यों !!
बीते वक्त के साए !!
खुद छुपा है जवाब इसमें !!
खुद ही सवाल भी है !!
कशमकश है !!!
एक कश्ती दो किनारे !!!
एक पाने की खुशी !!!
एक खोने का मलाल भी है !!!
सोचते हैं चलो सब iv
भूल कर सो जाते हैं iv
बचते हैं करके कनारा iv
गुजर जाते हैं iv
है गर लब पे पहरे तो iv
ख्वाबों में कलाम भी है iv
मुकद्दर से जो लड़ते हैं v
लोग नादां हैं v
है अगर यह ज़वाल v
तो कमाल भी है v





