वक़्त वही है, हालात बदल गये लगते है

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वक़्त वही है, हालात बदल गये लगते है,
दस्तूर-ए-मुलाक़ात, बदल गये लगते है,

रंज न कर, अपनी तन्हाई से, ए दोस्त,
जवाब वही, सवालात बदल गये लगते है,

मुहोब्बत आज भी बरकरार है जैसी थी,
दिल है वही, जज्बात बदल गये लगते है,

मयकदे जाते जरूर है पर पिते नहीं शराब,
पाँव वही है पर,सबात बदल गये लगते है,

हैरत से आना छोड़ रखा है,सपनों ने यहाँ,
वो रात है वही,जज्बात बदल गए लगते है !!!!

नीशीत जोशी (सबात = stability) 21.12.12

प्यार के वास्ते

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प्यार के वास्ते, उनके करीब आते रहे है,
गम-ए-जिन्दगी का असर, बताते रहे है,

ना कर बद-गुमानी, अपनी नजाकत की,
हम तो उन फूलो से भी, चोट खाते रहे है,

फरिस्ते भी माँगते है, दुआ उनके नबी से,
जमीं पर उतारने, चाँद को मनाते रहे है,

फितरत को बदल लो अपनी, सितमगर,
सितम भी, अब दर्द की ग़ज़ल गाते रहे है,

नहीं रखी है, कोई हसरत अब जिन्दगी में,
उनकी ख्वाइश को, अपनी बनाते रहे है !!!!

नीशीत जोशी 20.12.12

મધુર સબંધો એમ કંઈ બંધાતા નથી

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મધુર સબંધો એમ કંઈ બંધાતા નથી,
લાગણીઓના સુર કંઈ ગવાતા નથી,

લઇ ને ભલે દોડે બોજો એ હૃદય નો,
મળેલા ઝખમ કોઈને અપાતા નથી,

સહન કરવું પડે છે હસતા મોઢે બધું,
નફરતે સબંધોને કંઈ નખાતા નથી,

પારકાને પોતાના કરવા નથી સરળ,
કાળજે એમજ પથ્થર પથરાતા નથી,

નમતા રહેવું પડે છે સૌ પાસે પ્રેમ થી,
પ્રેમે બાંધેલા સબંધ એમ હણાતા નથી.

નીશીત જોશી 18.12.12

मेरी फुरकत में

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मेरी फुरकत में, जब तड़पा करोगे,
अकले बैठकर, तब रोया करोगे ।

आह निकलेगी, मेरी याद आने पे,
नामावर के आने से तौबा करोगे ।

ख़ुशनुमा रात लौट के ना आयेगी,
इन्तेज़ार में रात, बिताया करोगे ।

राह चलते भी, पिंदार मेरे ही होंगे,
दीदार को मेरे, बेहद तरसा करोगे ।

बे- ख़ुदी में ख़ुद, गुनाहग़ार समझोगे ,
मेरे जनाजे का, ख्व़ाब देखा करोगे ।

नीशीत जोशी (फुरकत = separation, नामावर = postman, पिंदार = thought ) 17.12.12

આ શરાબ પણ કંઈક આજ જૂની લાગે છે

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આ હવા માં આજે કોઈ તાજગી લાગે છે,
આ શરાબ પણ કંઈક આજ જૂની લાગે છે,

સુરાલય માં જવાવાળા ખબરદાર રહેજો,
પ્રિયેના હાથમાંનો પ્યાલો પાણી લાગે છે,

હોશમાં રે’વાની કોશિશ આજ થશે નિષ્ફળ,
મયની નદી આજ મહેફીલે વહેતી લાગે છે,

સમીર પણ આજ મદ-મસ્ત થઇ ગયો હશે,
એકલવાયાઓ ને પણ અહી મેદની લાગે છે,

સપના પણ આજ ઉઘી નહિ શકે સરખા રાત્રે,
અર્ધ ખુલ્લી આંખો પણ આજ જાગતી લાગે છે.

નીશીત જોશી 16.12.12

वोह एक चिड़िया है

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वोह एक चिड़िया है
रोज खिड़की पे झांकती है
पर
कहाँ से लाऊ
कोई दाना
जो
वोह खा सके
ना भी गर दूँ
उड़ के
चली जायेगी
ना कुछ बोलेगी
ना इतरायेगी
शायद
यह भी
अपनी
जिन्दगी जैसी है …

नीशीत जोशी 15.12.12

नहीं करते तबीब, नाईलाज दर्द की दवा

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जहाँ में यह रूह, मुहब्बत तो करती है,
मगर, चाहनेवालो के पीछे भटकती है,

लगा कर दिल,एक रोग किया हासिल,
फिर मुश्कुराने को, दिनरात तरसती है,

वो कतरा भी लगता है समंदर के जैसा,
आंसुओ को सैलाब कहकर मचलती है,

हर एक परछाई, अपने मासूक की लगे,
हर कोई आहट पर, यह रूह तड़पती है,

नहीं करते तबीब, नाईलाज दर्द की दवा,
दर्द- ए-दिल में दुआ ही साथ चलती है !

नीशीत जोशी 14.12.12

साकी तेरी आँखों में डूबना चाहता हूँ

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साकी तेरी आँखों में डूबना चाहता हूँ,
नशे में चूर हो कर बहकना चाहता हूँ,

पिलाये जाओ तूम जाम पे जाम साकी,
न पिने की वो कसम तोड़ना चाहता हूँ,

रकीब भी देख लेगा पिने का सलीका,
साकी,सभी से दोस्ती करना चाहता हूँ,

आँखों के जाम तू छलकाना छोड़ साकी,
मयखाना पि के खाली करना चाहता हूँ,

लड़खड़ा जो गया तो संभल लेना साकी,
तेरी बाहों में असर छोड़ना चाहता हूँ !

नीशीत जोशी 12.12.12

उतर आये है बादल

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उतर आये है बादल, आँखों में आब बनकर ,
बे-लगाम उमडेंगे – बरसेंगे वो, सैलाब बनकर ।

उभर के आती है, तसव्वुर में तस्वीर उसकी ,
सितम ढाह जाते हैं वो जज़्बात,ख्व़ाब बनकर ।

दिल को खरोंच खरोंचकर, पूछते थे जो सवाल ,
रूबरू आज खड़े है सब सवाल , जवाब बनकर ।

समंदर को मानो, किसी साहिल की तलाश है ,
लहर की शक्ल आये हैं अश्क़ , हिसाब बनकर ।

ग़र्दिश सिखा रही है, आसमानों के सितारों को ,
ज़मीं पे उतरे हैं अश्क़, दर्द के अज़ाब बनकर ।

– नीशीत जोशी 09.12.12

जब से तू मेरी जाँ हो गयी

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जब से तू मेरी जाँ हो गयी,
*कामिल हर इम्तिहाँ हो गयी, complete

चमन के हर फूल खिल उठे,
फूलो से मेरी पहेचाँ हो गयी,

रकीब बन गए दोस्त अब तो,
ये कायनात महेरबां हो गयी,

लिखे कुछ आसार कागज़ पे,
ग़ज़ल दिल की जूबाँ हो गयी,

हर वक़्त देखू तेरा ही नज़ारा,
हर मेरी हरकत नादाँ हो गयी !

नीशीत जोशी 08.12.12