A RESUMED IDENTITY
(AMBROSE BIERCE)
एक दूसरी पहचान (अंतिम भाग)
पानी के कुंड में देखने का खतरा
डॉक्टर के जाने के बाद, वह व्यक्ति भी आगे चल पङा, पर उसके दिमाग में , डॉक्टर से हुई बातचीत घूम रही थी। वह बैचेनी से घिर गया और एक पत्थर पर बैठ गया, उसका एक हाथ उसके घूटनों पर था । उसने अपनी पीठ पीछे की ओर करते हुए, इधर-उधर देखा। वह बहुत कमजोर और क्लांत दिख रहा था।
उसने अपने दोनों हाथों को चेहरे पर फेरा। वह बहुत चिंतित लगता था। वह अपनी उंगलियों के पोरों से लकीरें खींच सकता था। वह सोच रहा था कि कितनी हैरानी की बात है? एक बंदूक की गोली का लगना और सिर्फ थोङी देर की बेहोशी, कोई शारीरिक चोट भी नहीं हैं , कैसे? क्यों ?”
“मैं अवश्य अस्पताल में था।” वह जोर से बोला। ” मैं भी कितना मूर्ख हूँ । लङाई दिसंबर में हुई थी अभी तो गर्मियां हैं ।”.
वह जोर से हंसने लगा,” वह डॉक्टर मुझे पागलखाने से भागा हुआ कोई पागल समझ रहा होगा। पर मैं तो अस्पताल से भागा एक मरीज हूँ ।”
उसका ध्यान पास ही मैदान में एक जमीन के टूकङे पर गया जिसके चारों ओर पत्थर की दीवार बनी थी । वह बिना विचारे उस ओर बढ़ गया।
वहां एक चकोर पत्थर का स्मारक था। जो बहुत समय पुराना होने के कारण, अत्यधिक मिट्टी से भूरा दिखता था। समय की आंधी-तूफान ने उसमें काई और कीचड़ जमा दी थी।
उसके खंडों के बीच छोटे -छोटे, पर लंबे पौधे उग आए थे। उसने कल्पना की कि इन पौधों को जङ सहित निकाला जा सकता है, इस विचार के साथ ही उसके हाथ, पौधों को खिंचने लगे थे।
थोङी देर में ही उसे स्मारक पर लिखे शब्द नज़र आने लगे थे। जो नीनवेह और सोर शहरों की बर्बादी के समय के लग रहे थे। तभी उसकी नज़र जाने-पहचाने नाम पर पङी, उत्तेजना से वह कांपने लगा था। उसने पढ़ा:
हजेन की ब्रिगेड
अपने सैनिकों की याद में
जो स्टोन नदी में गिर गए थे।
31 दिसंबर 1862
वह आदमी यह पढ़ते ही दीवार के पीछे गिर गया, वह लगभग बेहोश ही हो गया था।
कुछ समय पहले हुई बारिश से वहाँ एक कुंड में साफ पानी भर गया था। उसने हिम्मत करके अपने को उठाया। घूटनों के बल, अपने कांपते हाथों पर अपना भार डालते हुए, उसने अपने शरीर को झुकाया और उस साफ पानी में अपने चेहरे का प्रतिबिंब देखा।
उसके मुख से दर्द भरी चीत्कार निकली। उसके हाथों ने उसका साथ छोङ दिया, वह मुंह के बल उस कुंड में गिर गया।
जिस तरह कभी उसे जीवनदान मिला था, उसी तरह वह जीवन के नए चरण पर पहुंच गया था।