'बारिश के पिंजड़े में' चंदनसिंह की, समकालीन कविता के दरवाज़े पर दी जानेवाली यह पहली दस्तक दूर तक सुनी जायेगी-क्योंकि यहाँ एक भरोसा है और उस भरोसे में हमारे समय की छिपी हुई 'आयरनी' भी- क्षमा करें
-केदारनाथ सिंह
बिरसा मुंडा और टंट्या भील जैसे नायकों की कहानियाँ तो हम जानते हैं, लेकिन संविधान सभा के भीतर आदिवासी प्रतिनिधियों ने अपने अधिकारों के लिए कैसे आवाज़ उठाई, यह इतिहास का एक कम चर्चित अध्याय है।
@JitendraMeenaDU
क्या प्रेम सच में कभी खत्म होता है… या कुछ प्रेम चिट्ठियों और इंतज़ार के बीच हमेशा ज़िंदा रहते हैं?
शिव शंकर झा की ‘ब्रह्मपत्र’ एक ऐसी ही कहानी है, जहाँ प्रेम के साथ जुड़ते हैं रहस्य, इंतज़ार और समय के कुछ अनकहे सवाल।
क्या एक दुबला-पतला, साधारण सा लड़का देश की सबसे कठिन सैन्य ट्रेनिंग को पार कर सकता है?
“अंधे घोड़े फौज में दौड़े” सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि नेवल जासूसी, खतरनाक ऑपरेशंस और असाधारण जज्बे की दिल दहला देने वाली दास्तान है।
कुछ जगहें सिर्फ जगहें नहीं होतीं… वे हमारी यादों का हिस्सा बन जाती हैं।
मिहिर जोशी की ‘बरामदे’ ऐसी ही कहानियों की किताब है, जहाँ बचपन, परिवार, दोस्त, पड़ोसी, पहला प्यार और बड़े होने की छोटी-छोटी उलझनें साथ चलती हैं। पढ़ते हुए कभी मुस्कान आती है, तो कभी अपने बीते दिनों की याद।