क्या आपका ऑफिस भी कभी-कभी किसी कॉर्पोरेट जंगल जैसा लगता है?
बॉस का दबाव, अप्रेजल की चिंता, ऑफिस पॉलिटिक्स और हर किसी से आगे निकलने की होड़—आख़िर इस कॉर्पोरेट जंगल में खुद को कैसे बचाया जाए?
पढ़िए यशवंत व्यास की किताब ‘कॉर्पोरेट जंगल का हिट उपदेश’|
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