एक नगरी हो अयोध्या सी,
हर आँगन राम बसे।
मर्यादा की गाथाएँ हों,
सबके मन प्रभु रमे।
सीता-सा स्नेह समाया हो,
लक्ष्मण-सी सेवा हो।
भरत-सा त्याग रगों में हो,
शत्रुघ्न-सी मेवा हो।
संसार कहे तब धन्य धरा,
जहाँ नीति का राज हो।
एक नगरी हो अयोध्या सी,
जहाँ राम के साज हो।🚩🚩🚩