🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩ॐबाल समय रवि भझि लियो
तब तीनहूँ लोक भयो अँधियारो
ताहिं सो त्रास भये जग को
यह संकट काहु सो जात न टारो
🌹🌹 कौन सो संकट मोर गरीब को🌹
🌹जो तुमसे नहीं जात है टारो 🌹🌹
💐 विश्व का कल्याण हो 💐
💐भारत अखंड हों 💐
सभी प्रिय मित्र मंडली परिवार को प्रणाम 🙏
ॐ उन सच्चिदानंद निराकार ब्रह्म में आसक्त चितवाले पुरुषों के साधन में परिश्रम विशेष है क्योंकि देहभिमानियो द्वारा अव्यक्तविषयक गति दु;खपुर्वक प्राप्त की जाती है
अध्याय १२स्लोक॥५