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इस बार का चुनाव किसी व्यक्ति या पार्टी का चुनाव नहीं था, बल्कि ये चुनाव जनता के अस्तित्व का चुनाव था, संविधान और लोकतंत्र को बचाने और तानाशाह को सबक़ सिखाने का चुनाव था, और जनता ने ये काम बख़ूबी किया।
ये चुनाव जनता ख़ुद लड़ रही थी, और ये समझ रही थी, कि अगर देश, संविधान, लोकतंत्र


















