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मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने संवेदनशीलता का भी निजीकरण कर दिया है।
पहले मूक-बधिर बच्चों का ऑपरेशन कराकर वाहवाही लूट ली, फोटो खिंचवा लिए, आंकड़े गिना दिए... लेकिन जब मशीनें खराब हुईं, बैटरियां बदलने की जरूरत पड़ी और परिवारों को मदद चाहिए थी, तब सरकार गायब हो गई।
नतीजा यह हुआ कि




