चलते चलते मेरे कदम बस यही सोचते रहते हैं माधव की मैं किस तरफ जाऊ की मुझे तुम मिल जाओ मेरे प्यारे
आंखे इस कदर तुम्हें ढूंढती है मेरे सखा
अब तो मिल जाओ मेरे गोविंद
वो और होंगे जिनको शिकायत हैं आपसे, वो और होंगे जिनको जरूरत है आपसे, अब तो मेरी फितरत को पहचान लो मेरे सखा, मुझे तो बस लगन है आपसे फिर चाहें आप मुझे दुर रखो या पास
मुझे तो बस प्रीत है आपसे मेरे प्यारे
माधव मैं ये नहीं कहती की मैं तुम्हारे सबसे करीब रहू, बस दूर रहकर भी दूरियां न रहे मेरे सखा, मेरे इतने पास रहना प्यारे
तुम्हारे होने से ही तो मैं हु मेरे गिरधर
अब मुझे नींद की तलाश नहीं हैं माधव, अब रातों को जागना अच्छा लगता हैं प्यारे,
मुझे नहीं मालूम की तुम मिलोगे या नहीं,
फिर भी आपसे आपको मांगना अच्छा लगता हैं मेरे सखा