त्योहारों पर घर वापसी का यह सफर... शहर के उस किराए के कमरे से गाँव की उम्मीदों तक। 🏠🛤️
सिस्टम की मार, पेपर लीक और "पढ़ा नहीं होगा" वाले तानों के बीच एक Aspirant का संघर्ष सिर्फ उसका कमरा जानता है। खाली जेब ने दुनिया का सबसे बड़ा सच सिखा दिया।
अगली होली, सफलता के रंगों वाली! 🎨
टूटे हुए सपनों की सुने कौन सिसकी ?
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी।
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ।
गीत नया गाता हूं।
- अटल बिहारी वाजपेयी
#atalbiharivajpayeeji