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Thursday, August 27, 2009

फिर कुछ याद आया...

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सुई में धागा आज पिरोया
कमरे की बत्ती में फिर मन खोया,

बीते दिनों में जकडे गए थे
एक बंधन से छूट रहे थे,

कोने में कुछ पड़े थे बक्से,
उन्हें खोल कर मन को आजाद कराया|

Monday, April 27, 2009

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एक रात के साये में
थोड़ी से परछाई में,
खोज रहा था ख़ुद को वो
मांग रहा था जीवन वो,
खुली आँखों में था वो सपना
मंजिल दूर किनारे और तिनका,
सिमटी हाथो की रेखाएं
कहती उसको चलते जाए,
नहीं अकेला था में आया
में और मेरा हमसाया..

Wednesday, February 11, 2009

O

Imageबाजारों की चलती गलिया
बिखरी बातें, खोजी अखिया
मनचाहे आकार को ढूंढे
रंग सलोने हाथ को तरसे
यह भी तो एक रूप है तेरा
बोले सपन अधूरे नैना
स्पर्श से जागे तनमय बतिया
खनके कानो में मीठी रैना...
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bazaro ki chalti galiya
bikhri batein, khoji akhiya
manchahe aakar ko dhoondhe
rang salone hath ko tarase
yeh bhi toh ek roop hai tera
bole sapan adhoore naina
sparsh se jage tanmay batiya
khanke kano mein meethi raina...

Monday, February 9, 2009

बूंद

Image "एक बूंद पड़े जो पानी की
गगरी तेरी छलती जाये
हवा जो उड़ती मुडती आये
साया भी तेरा छुपता जाये
कदम पड़े जो रेत में
धरती की प्यास भी बूँद में
चूड़ी तेरी लाक की
बूंदों का वज़न उठा न पाए
गगरी तेरी छलती जाये
बूंदों का वज़न उठा न पाए.."

Saturday, January 31, 2009

ख्याल

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कुछ मंदबुद्धि लोग भी अनचाहा सा कर गुज़रते है क्युकि वे जुटे रहते है...